Video: RSS प्रचारक को दूसरे समुदाय के लोगों ने पीटा, मचा बवाल.. पूरा शहर बना छावनी, SHO हटाए गए, धारा 144 लागू!

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र में गुरुवार शाम उस वक्त तनाव फैल गया, जब एक RSS प्रचारक के साथ मारपीट की घटना सामने आई। यह विवाद बाइक की साइड कटिंग (कट लगने) से शुरू हुआ और धीरे-धीरे हाथापाई और नारेबाजी में बदल गया। घटना ने पूरे इलाके में सांप्रदायिक तनाव का माहौल पैदा कर दिया।
थानेदार हटाए गए, धारा 144 लागू — प्रशासन सतर्क मोड में
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया। मुलताई थाना प्रभारी (SHO) को हटा दिया गया है और पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है।
स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने बताया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी भी अफवाह या उकसावे को रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जा रही है।
रिक्त SHO की जगह नरेंद्र सिंह परिहार को नए थाना प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है।
बैतूल जिले के मुलताई में RSS जिला प्रचारक शिशुपाल यादव के साथ मुस्लिम युवकों ने मारपीट की।वे बाइक से जा रहे थे, जब जैन कोल्ड ड्रिंक के पास कुछ मुस्लिम युवकों ने उनकी बाइक को टक्कर मारी।
शिशुपाल के विरोध करने पर विवाद बढ़ा और युवकों ने मारपीट की। क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी… pic.twitter.com/AiqkTIi6Cb
— Mr.Binod (@Mr__binod) October 9, 2025
आरोपी हिरासत में, CCTV फुटेज से अन्य की तलाश
पुलिस ने अब तक पांच युवकों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
साथ ही, वीडियो फुटेज और CCTV कैमरों के जरिए बाकी आरोपियों की पहचान की जा रही है।
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और एसपी वीरेंद्र जैन ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की।
वीडियो में दिखा विवाद का पूरा क्रम
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि बाइक की साइड कटिंग को लेकर कहासुनी पहले शुरू होती है।
देखते ही देखते हाथापाई और नारेबाजी शुरू हो जाती है, और मौके पर भीड़ इकट्ठी हो जाती है।
पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए माहौल को शांत करने की कोशिश की और कुछ देर में स्थिति को नियंत्रण में लिया।
कानून, सुरक्षा और राजनीति का संगम
यह घटना सिर्फ एक झगड़े से आगे बढ़कर कानून-व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव और राजनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा बन गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया, लेकिन यह सवाल जरूर उठाता है कि
👉 कैसे स्थानीय स्तर पर धार्मिक-सामाजिक तनावों को रोका जाए,
👉 और कैसे संवेदनशील क्षेत्रों में संवाद और भरोसा बनाए रखा जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीतिक बहस का केंद्र भी बन सकता है।



