बाढ़ ने छात्रों का रास्ता रोका, तो हेलीकाप्टर से परीक्षा देने पहुंचे, 40 हजार खर्चे पर बोले – “भविष्य के आगे कुछ नहीं”

हल्द्वानी/मुनस्यारी: उत्तराखंड की बारिश और भूस्खलन ने जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है, वहीं राजस्थान से आए चार छात्रों ने परीक्षा देने के लिए ऐसा कदम उठाया, जिसकी चर्चा अब हर जगह हो रही है। सड़क मार्ग बंद होने के बाद ये छात्र हल्द्वानी से मुनस्यारी तक हेलीकॉप्टर से पहुंचे और समय पर अपनी बीएड की परीक्षा दे पाए।

सड़क बंद होने से फंसे छात्र

राजस्थान के बालोतरा निवासी ओमाराम जाट, मागाराम जाट, प्रकाश गोदारा जाट और नरपत कुमार मुनस्यारी महाविद्यालय में बीएड की परीक्षा देने पहुंचे थे। लेकिन हल्द्वानी से मुनस्यारी जाने वाला मार्ग भारी बारिश और भूस्खलन के चलते बंद हो गया। ऐसे में छात्रों को डर था कि वे परीक्षा से वंचित न रह जाएं।

हेलीकॉप्टर बना सहारा

सड़क मार्ग ठप होने के बाद छात्रों ने हल्द्वानी से मुनस्यारी के बीच चलने वाली हेली सेवा से संपर्क किया। कंपनी ने तत्काल उनकी मदद की और बुधवार को चारों छात्र हेलीकॉप्टर से मुनस्यारी पहुंचे। उन्होंने परीक्षा दी और गुरुवार को हेलीकॉप्टर से वापस हल्द्वानी लौट आए।

जेब पर पड़ा भारी खर्च

हेलीकॉप्टर से सफर छात्रों की जेब पर भारी पड़ा। एक तरफ का किराया करीब ₹5,200 प्रति छात्र था, यानी दोनों तरफ का कुल खर्च लगभग ₹10,400 प्रति छात्र पड़ा। चारों छात्रों ने मिलकर करीब ₹41,600 रुपये खर्च किए। हालांकि छात्रों का कहना है कि यह खर्च उनकी पढ़ाई और भविष्य को बचाने के लिए जरूरी था।

पायलट और सेवा प्रदाता का आभार

छात्रों ने हेलीकॉप्टर सेवा की CEO रोहित माथुर और पायलट प्रवीण सिंह का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यदि यह सेवा उपलब्ध न होती तो उनका एक साल खराब हो जाता।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) के परीक्षा प्रभारी सोमेश कुमार ने बताया कि छात्रों को परीक्षा केंद्र चुनने का विकल्प दिया जाता है। इन छात्रों ने मुनस्यारी को केंद्र चुना था, लिहाज़ा केंद्र बदलना संभव नहीं था। ऐसे में हेलीकॉप्टर से पहुंचना उनका निजी निर्णय रहा।

सबक: आपदा में वैकल्पिक व्यवस्थाओं का महत्व

यह घटना इस बात को उजागर करती है कि प्राकृतिक आपदाओं और सड़क अवरोध जैसी समस्याओं से निपटने के लिए आपातकालीन विकल्पों का होना कितना जरूरी है। छात्रों का यह साहसिक कदम बताता है कि इच्छाशक्ति और विकल्प मिल जाएं तो कोई बाधा शिक्षा में रुकावट नहीं डाल सकती।

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