Nitin Gadkari की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत, Ethanol को CJI का ग्रीन सिग्नल.. जानिए क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली, 1 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। इस नीति के तहत अब देशभर में बेचे जाने वाले पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) का मिश्रण अनिवार्य किया गया है। अदालत ने साफ कहा कि यह नीति किसानों के हित में है और सरकार ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद इसे लागू किया है।

याचिका में क्या था मुद्दा?

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि पुराने वाहन, खासकर अप्रैल 2023 से पहले निर्मित वाहन, E20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं हैं। ऐसे वाहनों में इंजन की क्षमता प्रभावित होती है और नुकसान का खतरा बढ़ता है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के पास इथेनॉल-फ्री पेट्रोल (E0) या कम मिश्रण वाले पेट्रोल (E10) का विकल्प होना चाहिए।

याचिकाकर्ता की दलीलें

वरिष्ठ अधिवक्ता शादन फरासत ने अदालत में कहा कि –

  • अप्रैल 2023 के बाद बने वाहन ही E20 संगत (compliant) हैं।

  • NITI Aayog की 2021 की रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई थी कि पुराने वाहनों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।

  • E20 के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता (fuel efficiency) में लगभग 6% तक की गिरावट आती है।

  • पेट्रोल पंपों पर कोई स्पष्ट लेबलिंग नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं को जानकारी नहीं मिल पाती।

  • अमेरिका और यूरोपीय देशों में उपभोक्ताओं को E0 और ब्लेंडेड ईंधन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इंजन को हुए नुकसान की वजह से इंश्योरेंस क्लेम भी खारिज किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को इसका आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

अटॉर्नी जनरल की आपत्ति

भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका सिर्फ नाम भर के लिए दायर की गई है और इसके पीछे एक “बड़ा लॉबी ग्रुप” काम कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि –

  • सरकार ने नीति को लागू करने से पहले सभी पहलुओं का अध्ययन किया है।

  • इथेनॉल ब्लेंडिंग से देश के गन्ना किसानों को सीधा फायदा हो रहा है।

  • “क्या देश के बाहर के लोग तय करेंगे कि भारत में किस तरह का ईंधन इस्तेमाल होगा?” – उन्होंने अदालत में सवाल उठाया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अटॉर्नी जनरल की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने संक्षेप में आदेश सुनाया –
“याचिका खारिज की जाती है।”

क्या है विवाद?

याचिका में कहा गया था कि –

  • पुराने वाहनों में E20 से इंजन पार्ट्स में जंग (corrosion), समय से पहले घिसावट और मरम्मत का खर्च बढ़ता है।

  • उपभोक्ताओं को इथेनॉल से मिलने वाला लागत लाभ नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि पेट्रोल पंप अभी भी E20 को सामान्य पेट्रोल के समान दाम पर बेच रहे हैं।

  • उपभोक्ता अधिकार अधिनियम, 2019 के तहत नागरिकों को जानकारी और विकल्प का अधिकार है, जो इस नीति से प्रभावित हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर कोई रोक नहीं लगेगी। अदालत ने माना कि यह कदम किसानों के हित और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया है। हालांकि, पुराने वाहन मालिकों के सामने तकनीकी चुनौतियाँ और उपभोक्ता विकल्प की कमी जैसी चिंताएँ बनी रहेंगी।

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