बड़ी खबर: यूपी में बड़े RSS नेता के बेटे की क्रूर हत्या, आंखें फोड़ी – कान काट दिए.. हुआ भयंकर बवाल! टेंशन में CM Yogi

कुशीनगर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला सह-संघ चालक इंद्रजीत सिंह के बेटे उत्कर्ष सिंह की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला इतना बढ़ा कि उत्कर्ष की निर्मम पिटाई की गई, आंख फोड़ दी गई और कान तक काट दिए गए। इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई सहित कई मांगों पर अड़कर शव का अंतिम संस्कार रोक दिया।
गाय चराने के विवाद से हत्या तक पहुंचा मामला
शुक्रवार शाम उत्कर्ष सिंह पशु चराने खेत पर गए थे। इसी दौरान पास में झोपड़ी डालकर रह रहे कन्हई यादव के चार बेटों से उनका विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने फरसा, लाठी और डंडों से उत्कर्ष पर हमला कर दिया। हमले में उत्कर्ष के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। आंख फोड़ दी गई और कान काट डाले गए। उन्हें घायल अवस्था में पडरौना मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों का गुस्सा और बुलडोजर कार्रवाई की मांग
हत्या के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने शव को ढाई घंटे तक रोक कर रखा और आरोपियों के मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि आरोपियों का घर सरकारी जमीन और किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज भूमि पर बना है। इसके अलावा उन्होंने मृतक की पत्नी को नौकरी देने और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन की भूमिका और आश्वासन
मामला बिगड़ता देख एसडीएम (सदर) मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की सभी मांगों का ज्ञापन लिया और कार्रवाई का भरोसा दिया। आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी। प्रशासन की ओर से इस पूरे प्रकरण पर नजर रखी जा रही है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
एफआईआर और आरोपियों पर कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में कुबेरस्थान थाने में एफआईआर दर्ज की है। चारों आरोपी कन्हई यादव के बेटे बताए जा रहे हैं। इनमें से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्क्रीनशॉट और बढ़ता तनाव
हत्या की खबर सामने आने के बाद घटना स्थल की तस्वीरें और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगे। लोगों का गुस्सा प्रशासनिक निष्क्रियता और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता दिखा। ग्रामीणों की बुलडोजर कार्रवाई की मांग अब बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले रही है।
हत्या से उपजा आक्रोश और राजनीतिक रणनीति
गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव से पहले ऐसी घटनाएं प्रशासन और सत्ताधारी दलों पर दबाव बढ़ा देती हैं। ग्रामीणों का गुस्सा केवल अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर रहा है।



