Land For Job Case: तेजस्वी यादव के रिश्तेदारों ने कोर्ट में दी दलील, बोले- “सिर्फ ग्रुप D नौकरी मिली, तो फायदा कहां?

नई दिल्ली। बहुचर्चित रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाला केस (Land for Job Scam) की सुनवाई के दौरान आज विशेष अदालत में अहम बहस हुई। यह केस CBI बनाम लालू प्रसाद यादव एवं अन्य शीर्षक से चल रहा है।
आज सुनवाई में आरोपित सुनील यादव और संतलाल यादव की ओर से उनके वकील अर्पिता रावत, रोहिणी राणा और दिग्विजय रावत ने दलीलें पेश कीं। दोनों आरोपी, जो उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के रिश्ते में चचेरे भाई (second cousins) हैं, पर आरोप है कि उन्होंने 2004–2005 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान जमीन के बदले रेलवे में नौकरी हासिल की थी।
“बेहतर क्वालिफिकेशन होते हुए भी सिर्फ ग्रुप D नौकरी”
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि यह आरोप पूरी तरह से निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। वकीलों ने तर्क दिया कि अगर वास्तव में लालू प्रसाद यादव ने अपने रिश्तेदारों को अनुचित लाभ देना चाहा होता, तो उन्हें सिर्फ ग्रुप D नौकरी क्यों दी जाती?
वकील अर्पिता रावत ने कहा, “जब उनके पास बेहतर योग्यता थी, तब भी वे ग्रुप D पोस्ट स्वीकार कर रहे हैं। यह अपने आप में इस कथित ‘अनुचित लाभ’ की थ्योरी को खारिज करता है।”
CBI पर ‘पिक एंड चूज़’ का आरोप
बचाव पक्ष ने आगे तर्क दिया कि इसी भर्ती प्रक्रिया के तहत कई अन्य उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई थी, लेकिन CBI ने चुनिंदा लोगों को ही आरोपी बनाया है।
वकीलों ने कहा कि जांच एजेंसी ने मनमाने तरीके से कुछ नामों को चुनकर अभियोजन चलाया, जबकि बाकी लोगों को छोड़ दिया गया। इसे बचाव पक्ष ने ‘पिक एंड चूज़’ अप्रोच बताया।
“सिर्फ परिवारिक रिश्ते के कारण निशाना”
बचाव पक्ष ने कोर्ट को यह भी बताया कि सुनील यादव और संतलाल यादव बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्हें सिर्फ इसलिए आरोपी बनाया गया है क्योंकि वे लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़े हुए हैं।
वकीलों ने कहा कि आरोपियों को केवल पारिवारिक संबंधों की वजह से अनुचित तरीके से टारगेट किया जा रहा है, जबकि तथ्य और परिस्थितियां उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं दिखातीं।
मामले की अगली सुनवाई
अदालत में आज की बहस के बाद इस मामले की अगली सुनवाई तय होगी। यह केस पहले से ही राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।



