वेदांता vs अडानी: जयपी डील पर सुप्रीम कोर्ट में टकराव, ₹1000 करोड़ की बोली पर विवाद
वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अडानी के प्लान को दी चुनौती ₹1000 करोड़ ज्यादा बोली का दावा, IBC नियमों पर सवाल जयपी डील पर फैसला बना सकता है बड़ा मिसाल

देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों के बीच एक और बड़ा विवाद सामने आया है। Vedanta Limited ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और Adani Group के जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP) के रिजॉल्यूशन प्लान पर रोक लगाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
वेदांता ने National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) के 24 मार्च के फैसले को चुनौती दी है। इस फैसले में Adani Enterprises के प्लान को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई थी। दरअसल, Jaiprakash Associates इस समय दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। 17 मार्च को National Company Law Tribunal (NCLT) की इलाहाबाद बेंच ने अडानी का ₹14,535 करोड़ का प्लान मंजूर कर दिया था।
वेदांता की आपत्ति क्या है?
वेदांता का दावा है कि उसकी बोली अडानी से करीब ₹1,000 करोड़ ज्यादा बेहतर थी। कंपनी का कहना है कि लेंडर्स को वही प्लान चुनना चाहिए था जो सबसे ज्यादा वैल्यू देता हो। वेदांता ने यह भी आरोप लगाया है कि कम बोली को मंजूरी देना Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के मकसद के खिलाफ है, जिसका उद्देश्य कंपनियों की संपत्ति का अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करना है।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
वेदांता ने कोर्ट से अपील की है कि अडानी के प्लान पर तुरंत रोक लगाई जाए, क्योंकि अगर इसे लागू कर दिया गया तो उसकी याचिका बेअसर हो जाएगी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ जयपी तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले समय में देश के अन्य दिवालिया मामलों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।



