मिडिल ईस्ट में ‘तेल की जंग’ अब बन सकती है ‘पानी की जंग’, वाटर प्लांट बने नए निशाने
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वाटर डिसेलिनेशन प्लांट बने नए निशाने खाड़ी देशों की 60% से ज्यादा पानी की जरूरत इन्हीं प्लांट से पूरी होती है हमले की स्थिति में कई देशों में कुछ ही दिनों में गहरा जल संकट पैदा हो सकता है

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को अब तक तेल की जंग के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन हालात ऐसे बन रहे हैं कि यह संघर्ष पानी के लिए भी खतरनाक रूप ले सकता है। Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते टकराव के बीच अब समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले वाटर प्लांट भी निशाने पर आ गए हैं। इससे खाड़ी देशों में बड़े जल संकट का खतरा मंडरा रहा है।
वाटर प्लांट पर हमले से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में एक वाटर प्लांट पर हमला हुआ जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में Bahrain के एक वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला किया गया। यह प्लांट बड़ी आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराता है। जिस प्लांट पर हमला हुआ वह Qeshm Island के पास स्थित है। इस हमले के बाद आसपास के कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है।
खाड़ी देशों की पानी पर निर्भरता
मिडिल ईस्ट के अधिकतर देश रेगिस्तानी हैं, जहां प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बहुत कम हैं। इसलिए यहां समुद्र के खारे पानी को Desalination तकनीक के जरिए पीने योग्य बनाया जाता है। Persian Gulf क्षेत्र में 400 से ज्यादा वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट हैं और दुनिया की कुल डिसेलिनेशन क्षमता का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों के पास है। अगर इन प्लांट को निशाना बनाया गया तो Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar, Kuwait, Oman और Bahrain जैसे देशों में करोड़ों लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ सकता है।
ड्रोन और साइबर हमले का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, इन प्लांट पर ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट से हमला किया जा सकता है। इसके अलावा समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें (Naval Mines) पानी लाने वाली पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आधुनिक वाटर प्लांट पूरी तरह कंप्यूटर और सेंसर आधारित SCADA सिस्टम से चलते हैं, ऐसे में साइबर हमलों के जरिए भी इन्हें ठप किया जा सकता है या पानी के केमिकल बैलेंस को बिगाड़ा जा सकता है।
हमले के गंभीर नतीजे
अगर किसी बड़े वाटर प्लांट पर हमला होता है तो इसके असर कुछ ही घंटों में दिखने लगेंगे। Qatar, Kuwait और United Arab Emirates जैसे देशों के पास सीमित जल भंडार होता है, जो कुछ ही दिनों के लिए पर्याप्त होता है। प्लांट बंद होते ही शहरों में पानी का संकट खड़ा हो सकता है। कई जगह ये प्लांट बिजली भी बनाते हैं, इसलिए पानी के साथ बिजली संकट भी पैदा हो सकता है।
सुरक्षा के लिए बढ़ाए जा रहे इंतजाम
इस खतरे को देखते हुए Saudi Arabia समेत कई देशों ने अपने वॉटर प्लांट के आसपास मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। इनमें Patriot Missile System और Iron Dome जैसे सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा कई देश बड़े भूमिगत जल भंडार (Strategic Reservoir) भी बना रहे हैं और एक बड़े प्लांट की जगह कई छोटे-छोटे प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि किसी एक पर हमले से पूरी सप्लाई बंद न हो।



