भारत–थाईलैंड वायुसेना का पहला संयुक्त युद्धाभ्यास, 9 फरवरी को अंडमान के ऊपर
अंडमान के ऊपर पहली बार भारत-थाईलैंड वायुसेनाओं का संयुक्त अभ्यास सुखोई-30 और ग्रिपेन फाइटर जेट्स दिखाएंगे आसमान में ताकत मलक्का जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक संदेश, एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती

Indian army: भारतीय सेना के तीनों अंगों के साथ दुनिया के कई मित्र देश अभ्यास करना चाहते हैं. सफल ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी फेहरिस्त और भी लंबी हो गई है. इसी कड़ी में साल 2026 का पहला अभ्यास किसी मित्र देश की एयरफोर्स के साथ 9 फरवरी को अंडमान के पास आयोजित किया जा रहा है. भारत और थाईलैंड की वायु सेनाओं के बीच होने वाले इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना की ओर से फ्रंटलाइन फाइटर जेट सुखोई-30 और रॉयल थाईलैंड एयर फोर्स की ओर से ग्रिपेन फाइटर एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे. भारतीय वायुसेना के मिड-एयर रिफ्यूलर टैंकर और एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम एडब्ल्यूएसीएस की भी तैनाती की जाएगी.
भारत-थाईलैंड रक्षा संबंधों में नया अध्याय
भारत और थाईलैंड के रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां दोनों देशों की वायु सेनाएं पहली बार एक साथ युद्धाभ्यास करेंगी. अब तक दोनों देशों का सैन्य सहयोग मुख्य रूप से नौसेना तक सीमित था, लेकिन यह संयुक्त अभ्यास वायुसेना स्तर पर सहयोग को नई दिशा देगा.
अंडमान-निकोबार में होगा रणनीतिक अभ्यास
यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र के रणनीतिक रूप से संवेदनशील अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऊपर आयोजित किया जाएगा. भारतीय वायुसेना के 4 से 6 सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) फाइटर जेट अंडमान एयरबेस से उड़ान भरेंगे, जबकि रॉयल थाई एयर फोर्स अपने अत्याधुनिक ग्रिपेन फाइटर जेट्स के साथ इसमें शामिल होगी.
मिड-एयर रिफ्यूलिंग और AWACS की अहम भूमिका
लंबी दूरी की ऑपरेशनल क्षमताओं को परखने के लिए इस अभ्यास में मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर्स और एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) की तैनाती की जाएगी. ये सिस्टम फाइटर जेट्स को रियल-टाइम इंटेलिजेंस और निगरानी जानकारी मुहैया कराएंगे. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैनात रहेंगे.
मलक्का जलडमरूमध्य के पास सामरिक संदेश
इस सैन्य अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है. सामरिक दृष्टि से यह अभ्यास बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यह मलक्का जलडमरूमध्य के करीब हो रहा है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है.
एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मिलेगी मजबूती
अंडमान-निकोबार की भौगोलिक स्थिति भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त देती है. नौसेना के बाद अब वायुसेना स्तर पर सीधा सैन्य सहयोग भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूत करता है. साथ ही, यह अभ्यास दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करता है.



