कैलेंडर बदला, हालात वही: प्रदूषण की गिरफ्त में दिल्ली
कैलेंडर बदला, मगर दिल्ली की हवा नहीं बदली। हर साल नए वादे, हर मौसम वही ज़हरीला सच। प्रदूषण पर कार्रवाई कब? जनता पूछ रही है सवाल।

नई दिल्ली: पंचांग का एक और पन्ना गिर गया, लेकिन दिल्ली की हवा आज भी वही सवाल खड़े कर रही है। नया साल आ गया, योजनाओं के दावे भी नए हैं, मगर ज़मीनी हकीकत जस की तस है। राजधानी दिल्ली अब भी प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रही है।
वादों का मौसम, ज़मीन पर ज़हर
सरकारें बदलती रहीं, कैलेंडर बदलते रहे, लेकिन दिल्लीवासियों को अब भी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक बार-बार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जवाबदेही किसकी?
जनता पूछ रही है: “वादा आने का वफ़ा कीजिए, ये क्या अंदाज़ है? क्यों सौंपी है मेरे घर की दरबानी मुझे?” प्रदूषण पर नियंत्रण के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन ठोस समाधान अब तक ज़मीन पर दिखाई नहीं देता। दिल्ली की जनता अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है।
@BJP4Delhi सरकार और पर्यावरण मंत्री @RekhaGuptaBJP से सवाल साफ है, कैलेंडर तो बदल गया, दिल्ली की हवा कब बदलेगी?



