ट्रांस-अरुणाचल हाईवे जमीन मुआवजा घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, 6 ठिकानों पर छापेमारी, 2.62 करोड़ नकद जब्त
ED ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे जमीन मुआवजा घोटाले में अरुणाचल और असम के 6 ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई में 2.62 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए और 1.77 करोड़ रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए गए। जांच में फर्जी लाभार्थी, रिश्वतखोरी और अवैध संपत्ति खरीद के ठोस सबूत सामने आए हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED), ईटानगर ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे जमीन मुआवजा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 6 फरवरी 2026 को बड़ी कार्रवाई की। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में अरुणाचल प्रदेश और असम में कुल 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। ED के अनुसार, जिन स्थानों पर छापेमारी हुई, उनमें चार ठिकाने ईटानगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हैं, जबकि एक ठिकाना लिखाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) और एक आलों (मेचुका–चीन सीमा के नजदीक) में स्थित है। ये सभी इलाके दुर्गम, पहाड़ी और सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य जमीन मुआवजा घोटाले की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को उजागर करना है।
2.62 करोड़ रुपये नकद बरामद, बैंक खाते फ्रीज
छापेमारी के दौरान ED ने कुल 2.62 करोड़ रुपये नकद जब्त किए। इनमें से 2.40 करोड़ रुपये लिखाबा माज (निजी लाभार्थी और मामले की मुख्य कड़ी) के घर से और 22 लाख रुपये तदार बाबिन (निजी लाभार्थी) के आवास से बरामद किए गए। इसके अलावा, तदार बाबिन और भारत लिंगू (पूर्व DLRSO, जीरो) के बैंक खातों में जमा करीब 1.77 करोड़ रुपये भी फ्रीज कर दिए गए हैं।
अवैध संपत्ति खरीद के सबूत मिले
ED को छापेमारी के दौरान केमो लोल्लेन (पूर्व डिप्टी कमिश्नर, जीरो), उनके परिवार के सदस्यों, भारत लिंगू, टोको ताजे (जूनियर इंजीनियर, PWD) और लिखाबा सोनी (निजी लाभार्थी) के ठिकानों से कई अहम दस्तावेज मिले हैं। इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि जमीन मुआवजा की रकम का इस्तेमाल अवैध तरीके से संपत्तियां खरीदने में किया गया।
पहले भी करोड़ों की संपत्ति फ्रीज
इससे पहले की जांच में ED ने करीब 3.95 करोड़ रुपये के बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) फ्रीज किए थे। ये खाते कबाक भट्ट (जूनियर इंजीनियर, PWD) और M/s T & G Enterprises से जुड़े पाए गए थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सरकारी मुआवजा राशि से बिना अनुमति लगभग 175 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट बनाई गईं। इन FD से मिले ब्याज में से करीब 2.79 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया, जबकि 21.57 लाख रुपये का ब्याज सीधे कबाक भट्ट के निजी खाते में ट्रांसफर किया गया।
विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में कबाक भट्ट के खिलाफ PMLA के तहत विशेष अदालत में चार्जशीट (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल कर दी है।
ट्रांस-अरुणाचल हाईवे परियोजना से जुड़ा मामला
यह पूरा घोटाला ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन–बोपी, 0 से 157.70 किमी) सड़क परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण में दिए गए मुआवजे से जुड़ा है। इस परियोजना को याचुली, जीरो और रागा सेक्टर में बांटा गया था। शुरुआत में मुआवजे के लिए 289.40 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए थे, जिसे बाद में घटाकर 188 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं और निजी लोगों को अवैध लाभ पहुंचाया गया।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने खोली पोल
राज्य सरकार की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि याचुली सेक्टर में जहां 38.18 करोड़ रुपये का मुआवजा बनता था, वहां 66.25 करोड़ रुपये वितरित कर दिए गए। यानी करीब 28 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसी तरह जीरो और रागा सेक्टर में भी भारी वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं। कुल मिलाकर इस घोटाले से सरकार को लगभग 44.98 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
फर्जी लाभार्थी और रिश्वतखोरी के सबूत
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी लाभार्थी बनाए गए, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की गई और मुआवजा राशि को गलत खातों और FD के जरिए निजी लोगों तक पहुंचाया गया। कई मामलों में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने और उस पैसे को अलग-अलग तरीकों से घुमाने (लेयरिंग) के भी सबूत मिले हैं। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल जमीन मुआवजा घोटाले में ED की जांच जारी है।



