चार वर्षों में पंजाब की वित्तीय सेहत में बड़ा बदलाव: हरपाल सिंह चीमा

पंजाब ने कर, जीएसटी और आबकारी राजस्व में दर्ज की बड़ी बढ़ोतरी। चार वर्षों में स्टांप ड्यूटी और पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक उछाल। कर्ज बोझ के बावजूद वित्तीय अनुशासन और डिजिटल सुधारों पर जोर।

चंडीगढ़, 3 मार्च 2026ः पंजाब के वित्त, आबकारी और कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के नेतृत्व में पंजाब राजस्व विकास में शानदार उपलब्धियों के लिए देश के शीर्ष तीन राज्यों में उभरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की वित्तीय कार्यप्रदर्शन संरचनात्मक सुधार, वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को दर्शाता है। यहां पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब की वित्तीय सेहत में आए इस निर्णायक बदलाव को उजागर करने के लिए विस्तृत आंकड़े पेश किए।

 

अपने कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘पंजाब के अपने कर राजस्व में भारी वृद्धि हुई है, जो कि 2021-22 में कुल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) का 6.39 प्रतिशत यानी 37,327 करोड़ रुपये था, वह बढ़कर 2024-25 में 57,919 करोड़ रुपये हो गया है, जो कि कुल राज्य घरेलू उत्पाद का 7.15 प्रतिशत बनता है।’

 

आबकारी राजस्व में 86.77 प्रतिशत उछाल

आबकारी प्राप्ति के आंकड़े पेश करते हुए मंत्री ने बताया कि आबकारी राजस्व में चार वर्षों से भी कम समय में 86.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अकाली-भाजपा सरकार के पांच वर्षों में कुल आबकारी प्राप्ति 20,545 करोड़ रुपये (वार्षिक औसत 4,109 करोड़) रही। कांग्रेस सरकार ने पांच वर्षों में 27,395 करोड़ रुपये (वार्षिक औसत 5,479 करोड़) जुटाए। इसके विपरीत, ‘आप’ सरकार ने जनवरी 2026 तक 37,975 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त कर लिया है, जिसकी वार्षिक औसत 9,907 करोड़ रुपये है। 2021-22 में 6,157 करोड़ रुपये रहा आबकारी राजस्व 2025-26 में 11,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

 

जीएसटी संग्रह में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी प्राप्ति में भी बड़ी सफलता दर्ज की गई है। पिछली कांग्रेस सरकार की पांच वर्षों की कुल जीएसटी प्राप्ति 61,286 करोड़ रुपये (वार्षिक औसत 12,257 करोड़) थी। ‘आप’ सरकार ने जनवरी 2026 तक 83,739 करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं, जिससे वार्षिक औसत 21,845 करोड़ रुपये हो गई है। 2021-22 में 15,542 करोड़ रुपये रहा राज्य जीएसटी राजस्व 2025-26 में 26,500 करोड़ रुपये पार करने का अनुमान है।

 

स्टांप ड्यूटी से रिकॉर्ड राजस्व

स्टांप ड्यूटी संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अकाली-भाजपा सरकार (2012-17) ने 12,387 करोड़ रुपये (वार्षिक औसत 2,477 करोड़) जुटाए, जबकि कांग्रेस (2017-22) ने 12,469 करोड़ रुपये (वार्षिक औसत 2,494 करोड़) एकत्र किए। ‘आप’ सरकार ने जनवरी 2026 तक 19,515 करोड़ रुपये (वार्षिक औसत 5,091 करोड़) प्राप्त किए हैं, जो पिछली सरकारों की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक है।

 

पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक विस्तार

विकास के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए मंत्री ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार ने पांच वर्षों में 14,641 करोड़ रुपये और कांग्रेस ने 19,356 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय पर खर्च किए। वहीं ‘आप’ सरकार 31,630 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।

 

विरासत में मिला कर्ज और वित्तीय प्रबंधन

मंत्री ने बताया कि सरकार को लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिला। नए कर्ज का 35 प्रतिशत हिस्सा पुरानी देनदारियां चुकाने और 50 प्रतिशत ब्याज भुगतान में खर्च होता है। इसके बावजूद सरकार ने कर्ज-जीएसडीपी अनुपात को 48.25 प्रतिशत से घटाकर 44.47 प्रतिशत कर दिया है।

 

वेतन आयोग और संस्थानों को राहत

सरकार ने वेतन आयोग लागू करने के लिए 7,000-8,000 करोड़ रुपये रखे हैं और 14,191 करोड़ रुपये के लंबित बकाए चुकाए जा रहे हैं। पनस्प, लैंड मॉर्टगेज बैंक, पीएसआईडीसी और मंडी बोर्ड जैसी संस्थाओं को 2,566 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।

 

रिजर्व फंड में 287 प्रतिशत की वृद्धि

31 मार्च 2022 तक कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड में 3,027 करोड़ रुपये थे, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 10,738 करोड़ रुपये हो गए। गारंटी रिडेम्पशन फंड में 982 करोड़ रुपये जोड़े गए। कुल मिलाकर 11,720 करोड़ रुपये का रिजर्व बन गया है, जो 287 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

 

केंद्रीय सहायता में 62 प्रतिशत कमी

कांग्रेस सरकार को 2017-22 के दौरान 72,340 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली थी। इसके विपरीत, मौजूदा सरकार को जनवरी 2026 तक 27,832 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जो 62 प्रतिशत कम है।

 

डिजिटल सुधार और पारदर्शिता

वित्त मंत्री ने बताया कि ‘पेंशन सेवा पोर्टल’ के माध्यम से पेंशन वितरण को डिजिटल किया गया है और ‘ई-डिपॉजिट मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू किया गया है। एस.एन.ए.-स्पर्श पहल के तहत योजनाओं के डिजिटलीकरण के लिए राज्य को 800 करोड़ रुपये से अधिक प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

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