एक लाख से ज्यादा लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा लेटर: आवारा कुत्तों को हटाने का ऑर्डर रोकने की अपील

“देश भर के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा लेटर पिटीशन, आवारा कुत्तों को सरकारी परिसर से हटाने के आदेश के खिलाफ आवाज़ उठाई। 1 लाख से ज्यादा लोगों ने इस जन आंदोलन में हिस्सा लिया।”

29 नवंबर, शनिवार को एक अनोखा जन आंदोलन देखने को मिला। देश भर के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को लेटर पिटीशन के जरिए यह संदेश दिया कि आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने का आदेश गलत है। सुबह 9 बजे से लोग पोस्ट ऑफिस में अपने लेटर पोस्ट करने लगे, और दिन के अंत तक यह संख्या 1 लाख से भी ज्यादा हो गई। इस पूरी पहल को animalwrites.in वेबसाइट के माध्यम से मैनेज किया गया। शाम तक 50,000 से ज्यादा लोगों ने अपने सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए लेटर की रसीद भी वेबसाइट पर अपलोड की थी।

 

लेटर पिटीशन क्या है?

लेटर पिटीशन एक तरीका है जिसके जरिए आम लोग किसी सार्वजनिक मुद्दे को सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा सकते हैं। इस मामले में लोग कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को जारी आदेश में सभी सरकारी संस्थानों के परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। इस लेटर पिटीशन के जरिए लोग इस आदेश को रोकने, उसे वापस लेने और इस पर फिर से विचार करने की अपील कर रहे हैं।

 

लखनऊ में काउंटरों में लगी लंबी लाइने

देश के 70 से ज्यादा जिलों से हजारों लोग इस आंदोलन में शामिल हुए। लखनऊ में डॉ. विवेक बिस्वास पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जीपीओ में अपने लेटर पोस्ट किए। धीरे-धीरे लाइन इतनी लंबी हो गई कि कई काउंटर खोलने पड़े। ब्रेल में लिखे लेटर वाले दिव्यांग स्टूडेंट्स, बच्चे, वकील, डॉक्टर, होममेकर और आम लोग भी इस पहल में शामिल हुए।

 

दिल्ली और अन्य शहरों से भी भारी समर्थन

दिल्ली के कई एनिमल एक्टिविस्ट्स भी सुप्रीम कोर्ट को लेटर लिखने आए। अंबिका शुक्ला ने कहा, “इतिहास में शायद ही कभी इतने लोग एक ही दिन में चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजने के लिए आए हों। यह ऑर्डर अनसाइंटिफिक, इंप्रैक्टिकल और कानून के खिलाफ है। यह जानवरों के लिए मौत की सजा जैसा है।” इम्फाल और जोधपुर में काउंटर को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा क्योंकि लेटर की सप्लाई खत्म हो गई थी। वहीं वडोदरा, हैदराबाद, बैंगलोर, चेन्नई और कई अन्य शहरों में अलग काउंटर बनाए गए थे।

 

क्यों खास था यह इवेंट?

इस इवेंट की सबसे खास बात यह थी कि यह बिना बैनर वाला आंदोलन था। इसका मतलब है कि किसी एक संस्था या व्यक्ति ने इसे चलाया नहीं, बल्कि यह पूरे देश के लोगों की पहल थी।देश के हर कोने से लोग इस पहल में शामिल हुए, उत्तर-पूर्व से लेकर पश्चिमी तट, बंगाल और केरल से लेकर तमिलनाडु, और गोवा, बिहार, मध्य प्रदेश तक। यह सच में एक जन आंदोलन था।

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