यूपी में एक और स्टिंग ऑपरेशन से हड़कंप, सीधा CMO ऑफिस में बैठे रिश्वतखोर.. रेट भी तय, कैमरे पर मांगे 50 हजार!

दैनिक भास्कर ने अपनी एक्सक्लूसिव स्टोरी में एटा (UP) के CMO ऑफिस का एक हैरान करने वाला सच सामने लाया है। रिपोर्ट में दिखाया गया कि कैसे पैथोलॉजी लैब रजिस्ट्रेशन, बायोमेडिकल वेस्ट और पॉल्यूशन NOC जैसे अहम कागज़ात के लिए ‘दलाल–बाबू नेटवर्क’ सक्रिय है। यहाँ हर काम का फिक्स रेट है और रुपए देने पर फाइलें तुरंत पास हो जाती हैं, वरना लोगों को ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते हैं।
बाबू दीपक पांडे का दावा — “पैसे दो, कागज़ बन जाएंगे”
भास्कर की जांच में सबसे पहले सामने आए बाबू दीपक पांडे। रिपोर्टर से बातचीत में उन्होंने कहा कि बायोमेडिकल और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट राघव कंप्यूटर सेंटर से बनते हैं। जब रिपोर्टर ने जल्दी प्रक्रिया की बात की तो उनका सीधा जवाब था—“पैसे दो, तुरंत कागज़ बन जाएंगे।”
मो. सोहिब की भूमिका — “पहले कागज़ बनवाओ, फिर बाबू से मिलना”
राघव कंप्यूटर सेंटर पर मिले मो. सोहिब ने पूरे काम का प्रोसेस बताया। उन्होंने साफ कहा कि “पहले कागज़ तैयार कराओ, फिर CMO ऑफिस के बाबू से मिलना होगा।” सोहिब ने यहां तक कहा कि बायोमेडिकल, पॉल्यूशन, फायर सिलिंडर—सबकी फाइल यहाँ बन सकती है।
दलाल क़ासिम अली का ऑफर — “रजिस्ट्रेशन का ठेका तैयार”
भास्कर की रिपोर्ट में सामने आए दलाल क़ासिम अली ने खुद रजिस्ट्रेशन का ठेका लेने की बात स्वीकारी।
-
उनका दावा था कि 20,000 रुपये में बायोवेस्ट का सालाना रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।
-
पॉल्यूशन NOC का वन-टाइम खर्च 35,000 रुपये बताया गया।
-
इतना ही नहीं, क़ासिम ने कहा कि किसी अधिकारी से मिलने की ज़रूरत नहीं—“55,000 रुपये दीजिए और काम हो जाएगा।”
वीडियो कॉल से ‘डॉक्टर कनेक्शन’ — नया तरीका
दलाल क़ासिम ने एक और ‘शॉर्टकट’ बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर CMO ऑफिस के बाबू मुकेश से बात करा देंगे और डॉक्टर से वीडियो कॉल पर ही औपचारिकता पूरी हो जाएगी। यानि असल सिस्टम को दरकिनार कर काम ‘ऑन-स्क्रीन’ निपटाया जा सकता है।
स्टेनो मुकेश का नाम भी शामिल
भास्कर की जांच में CMO ऑफिस के स्टेनो मुकेश का नाम भी सामने आया। रिपोर्टर से बातचीत में मुकेश ने कहा—“पहले कागज़ कंप्लीट कराओ, फिर मुझसे मिलना। बाकी टेंशन मत लो, काम हो जाएगा।” यह बयान पूरे नेटवर्क की गहराई को दिखाता है।
दलाली का पूरा नेटवर्क कैसे चलता है?
भास्कर द्वारा जारी ग्राफिक्स में दलाली का पूरा पैटर्न समझाया गया:
-
CMO ऑफिस से आने वालों को कंप्यूटर सेंटर या दलालों के पास भेजा जाता है।
-
हर परमिशन का रेट तय है—बायोमेडिकल वेस्ट कलेक्शन 20,000 रुपये सालाना, पॉल्यूशन कंट्रोल NOC 35,000 रुपये, लाइसेंस रिन्यूअल 1,000–2,000 रुपये।
-
CMO ऑफिस में 50,000 रुपये देकर लैब का रजिस्ट्रेशन हो सकता है।
असल नियम क्या कहते हैं?
यूपी में पैथोलॉजी लैब खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है।
-
पहले एक साल का अस्थायी रजिस्ट्रेशन मिलता है।
-
एक साल बाद स्थायी रजिस्ट्रेशन तभी मिलता है जब पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर उपस्थित होकर शपथ-पत्र दें।
-
यह साफ नियम है कि बिना डॉक्टर की मौजूदगी लैब का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता।
गंभीर सवालों के घेरे में CMO ऑफिस
भास्कर की इस रिपोर्ट ने दिखा दिया कि जनता की सेहत से जुड़े नियम-कायदे कैसे दलाली और रिश्वतखोरी की भेंट चढ़ रहे हैं। पैथोलॉजी लैब और मेडिकल वेस्ट जैसी संवेदनशील सेवाओं में अगर रिश्वत का खेल चलता रहा तो यह सीधे पब्लिक हेल्थ रिस्क में बदल सकता है।
नोट: यह रिपोर्ट पूरी तरह Dainik Bhaskar की एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन पर आधारित है। भास्कर की पूरी रिपोर्ट का लिंक -> https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/lucknow/news/up-pathology-lab-registration-scam-exposed-etah-135981496.html



