CM योगी की नाक के नीचे ‘लाशों का कारोबार’, स्टिंग ऑपरेशन से हिला यूपी, सिपाही-कोतवाल और बड़े अधिकारी शामिल?

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लावारिस शवों की खरीद-फरोख्त का खेल बेखौफ चल रहा है। बरेली के पोस्टमॉर्टम हाउस से लेकर पुलिस थानों तक फैला यह नेटवर्क शवों को मेडिकल कॉलेजों तक पहुँचाने का अवैध कारोबार कर रहा है। मशहूर मीडिया हाउस ‘दैनिक भास्कर’ ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। शवों के बदले 40 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की डील होती है और इसमें पुलिसकर्मियों से लेकर अस्पताल कर्मचारियों तक की संलिप्तता सामने आई है।

स्टिंग में क्या सामने आया?

हम आपको दैनिक भास्कर द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन को विस्तार से समझाने का प्रयास करेंगे। दरअसल, दैनिक भास्कर की टीम ने दलाल बनकर बरेली जिला अस्पताल के पोस्टमॉर्टम हाउस में संपर्क साधा। वहां तैनात कर्मचारी सुनील ने खुले शब्दों में स्वीकार किया कि शवों को मेडिकल कॉलेजों तक पहुँचाने के लिए पुलिस और अन्य अधिकारियों से मिलकर काम किया जाता है। बातचीत में सुनील ने कहा:

“जो पैसे आप हमें दोगे, हम तो नमक के बराबर रखते हैं। बाकी पैसे ऊपर अधिकारी को देने पड़ते हैं।”

इसके अलावा, बरेली नगर कोतवाली में तैनात सिपाही नरेंद्र ने भी साफ कहा:

“कमाना सभी को है। हमें ऊपर SHO साहब से बात करनी पड़ेगी। हम बात कर लेंगे।”

यह स्पष्ट संकेत है कि यह कोई छोटा खेल नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के अंदर फैला एक गहरा भ्रष्टाचार है।

शवों का सौदा कैसे होता है?

  1. पुलिस को हर सप्ताह ऐसे शव मिलते हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाती।

  2. उन्हें जिला अस्पताल के शवगृह में रखा जाता है।

  3. 72 घंटे तक पहचान न होने पर नियम अनुसार अंतिम संस्कार कर देना चाहिए।

  4. मगर कागजों में अंतिम संस्कार दिखाकर खर्च का पैसा हड़प लिया जाता है।

  5. फिर शवों को मेडिकल कॉलेजों तक बेचा जाता है।

  6. सौदे की रकम 40 हजार से डेढ़ लाख तक जाती है।

सुनील ने यह भी बताया कि “महीने में 30 से 40 लाशें निकल जाती हैं। आप बहुत कम दे रहे हैं। अभी पुराना रिकॉर्ड देखा जाए… उस समय डेढ़ लाख का रेट चल रहा था।”

किन जिलों में फैला है यह कारोबार?

स्टिंग में सामने आया कि यह खेल सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं है। सुनील ने खुद बताया:

“सीतापुर में हमारा दोस्त है… साथ ही हरदोई, पीलीभीत, लखनऊ, मुरादाबाद और लखीमपुर-खीरी में भी सब जानते हैं हमारे…”

यह बताता है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लावारिस शवों का यह नेटवर्क सक्रिय है।

क्यों खरीदी जाती हैं लाशें?

जांच में पता चला कि कुछ प्राइवेट मेडिकल कॉलेज MBBS की मान्यता बनाए रखने के लिए शव खरीदते हैं। नियम यह है कि किसी व्यक्ति की देह उसकी सहमति या परिजनों की अनुमति के बिना मेडिकल संस्थानों को नहीं दी जा सकती। फिर भी अवैध तरीके से शव खरीदे जा रहे हैं। राममूर्ति मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थानों का नाम भी सामने आया, हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

जब इस मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया, तो बरेली के CMO ने कहा कि मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर कोतवाली के पूर्व प्रभारी ने बयान देने से इनकार कर दिया और कहा:

“किसी और से बात कर लो…”

यह रवैया खुद व्यवस्था की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।

शव सौदे की पूरी प्रक्रिया: बातचीत से खुलासा

पोस्टमॉर्टम कर्मचारी सुनील ने कहा:

“पहले बांडियाँ देखेंगे… उसके बाद हमारी एम्बुलेंस आएगी… उसमें रखवा देना…”
“हम ऊपर से सबको मिलाकर चलेंगे… कोतवाल को भी…”
“देखिए, हमने आपसे कहा है पूरा काम करेंगे…”

सिपाही नरेंद्र का बयान:

“आती रहती हैं बांडियाँ… पड़ी भी रहती हैं 4 से 5…”
“आपका कौन सा कॉलेज है?”
“हमें ऊपर SHO साहब से बात करनी पड़ेगी…”

इससे स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया सुनियोजित है और हर स्तर पर इसकी जड़ें फैली हुई हैं।

क्या नियम है शवों को लेकर?

दैनिक भास्कर द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार:

  1. शव मिलने पर पंचनामा बनाना अनिवार्य है।

  2. शव की पहचान के लिए आसपास के लोगों से पूछताछ करनी चाहिए।

  3. पहचान न होने पर 72 घंटे के भीतर अंतिम संस्कार कर देना होता है।

  4. शवों की जानकारी मीडिया में देना भी आवश्यक है।

इन नियमों की खुलेआम अनदेखी कर शवों की खरीद-फरोख्त की जा रही है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल: सच सामने आया

यह स्टिंग ऑपरेशन 15 दिनों तक चला। टीम ने खुद को दलाल बताकर शवों की डिमांड की और बातचीत रिकॉर्ड की। इससे स्पष्ट हुआ कि शवों का यह कारोबार सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि पुलिस, अस्पताल और निजी संस्थानों की मिलीभगत से चल रहा है।

दैनिक भास्कर की टीम ने इस घिनौने खेल को उजागर किया, ताकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करें और लावारिस शवों की गरिमा की रक्षा हो सके।

Full Report of Dainik Bhaskar -> https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/bareilly/news/up-dead-body-racket-busted-bareilly-police-postmortem-employee-135890874.html

मानवता पर कलंक

यह मामला न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि मानवता पर कलंक है। लावारिस शवों की इस खरीद-फरोख्त में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता इस घिनौने कारोबार को बढ़ावा दे रही है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग है।

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