पूजा पाल ने कराई एक और बाहुबली की एंट्री, SP विधायक ने कहा – “कहां गई मिट्टी में मिलाने वाली बातें ?”

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों समाजवादी पार्टी (SP) का फैसला बड़ा विवाद बना हुआ है। पार्टी ने अपनी ही विधायक पूजा पाल को निष्कासित कर दिया क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुलकर तारीफ की थी। दरअसल, पूजा पाल का राजनीतिक सफर बेहद दर्दनाक घटनाओं से जुड़ा रहा है। उनके पति राजू पाल की हत्या बाहुबली अतीक अहमद ने कराई थी और योगी सरकार के कार्यकाल में ही उन्हें इंसाफ मिला था। यही कारण था कि उन्होंने सीएम योगी की सराहना की। लेकिन सपा ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।
सपा का बैकफुट और नया चेहरा विजमा यादव
पूजा पाल को निकालने के बाद समाजवादी पार्टी अचानक बैकफुट पर आ गई। पार्टी पर यह आरोप लगने लगे कि उसने एक शहीद नेता की पत्नी को सिर्फ इसलिए हटा दिया क्योंकि उन्होंने योगी की तारीफ कर दी। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए सपा ने एक और महिला नेता को सामने किया — विजमा यादव।
सपा विधायक विजमा यादव के पति और सपा विधायक जवाहर पंडित की हत्या वर्ष 1996 में हुई थी। यह हत्या उस दौर के कुख्यात बाहुबली और भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया पर आरोपित की गई थी। लंबे संघर्ष के बाद विजमा यादव ने अपने पति के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाया था।
जवाहर पंडित हत्याकांड और करवरिया बंधु
जवाहर पंडित हत्याकांड उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा चर्चित मामला रहा है। इस हत्याकांड में उदयभान करवरिया, कपिल मुनि करवरिया, सूरजभान करवरिया और एक अन्य आरोपी को दोषी ठहराया गया था। विजमा यादव ने 18 साल तक इस लड़ाई को लड़ा और आखिरकार अदालत से न्याय हासिल किया।
लेकिन हाल ही में भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया को अच्छे आचरण के आधार पर समय पूर्व रिहाई मिल गई। यही मुद्दा अब फिर से गरमा गया है।
विजमा यादव का भाजपा पर हमला
सपा विधायक विजमा यादव ने अपने पति के सजायाफ्ता कातिल की रिहाई को लेकर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से गलत है। उनका कहना था कि जब 18 साल लंबी लड़ाई के बाद दोषियों को जेल भेजा गया था, तब इस तरह की रिहाई पीड़ित परिवारों के जख्म फिर से हरे कर देती है। उन्होंने सीधे योगी आदित्यनाथ को ललकारते हुए कहा कि “अब कहां गई माफियाओं को मिट्टी में मिलाने वाली पॉलिसी?”
सपा की रणनीति और बाहुबलियों की वापसी
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि समाजवादी पार्टी ने पूजा पाल के निष्कासन से पैदा हुए नुकसान को संतुलित करने के लिए विजमा यादव को आगे बढ़ाया है। एक तरफ जहां पूजा पाल ने अतीक अहमद जैसे बाहुबली के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ी थी, वहीं विजमा यादव ने उदयभान करवरिया जैसे दबंग नेता को सजा दिलवाई थी।
यानी एक बार फिर यूपी की राजनीति में महिला नेताओं के ज़रिए बाहुबलियों और उनके अपराधों का मुद्दा केंद्र में आ गया है।



