बड़ी खबर: RSS ने बिहार भेजे 10 हजार स्वयंसेवक, मोहन भागवत का ‘मेगा प्लान’ एक्टिव, सामने आई पूरी रणनीति!

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति तेजी से बदल रही है। एक तरफ 16 हजार स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर वोटरों को साधने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ RSS चीफ मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट की बहस पर नया मोड़ आ गया है। इस बीच कांग्रेस का “वोट चोरी” और “SIR” विवाद, साथ ही अमेरिका के ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाने की धमकी भी सियासी माहौल में नई परतें जोड़ रहे हैं।
बिहार में RSS की बड़ी रणनीति
जैसा कि पहले बताया गया, बिहार में 10 हजार बाहरी और 6 हजार स्थानीय स्वयंसेवक इस वक्त एक्टिव हैं। गांवों में 10-15 लोगों की टीमें चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाकर लोगों को साध रही हैं। मुद्दे हैं— राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और विकास।
हरियाणा और दिल्ली मॉडल पर काम
सूत्र बताते हैं कि RSS ने पहले हरियाणा और फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों में इसी तरह की रणनीति अपनाकर BJP को जीत दिलाई थी। बिहार को दो हिस्सों — उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार — में बांटा गया है। उत्तर बिहार का संचालन मुजफ्फरपुर से और दक्षिण बिहार का पटना से होता है। हर गांव में 10–15 स्वयंसेवक तैनात हैं, जो चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं।
वोटरों की तीन कैटेगरी: पक्के, कन्फ्यूज और रूठे
RSS कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर वोटरों की लिस्ट बनाई है। इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है:
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BJP के पक्के वोटर
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कन्फ्यूज वोटर
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रूठे वोटर
अब दूसरी टीमें इन लिस्टों के आधार पर काम कर रही हैं। कन्फ्यूज वोटर को समझाया जा रहा है कि बिहार और देश के लिए कौन-सी पार्टी सही है। वहीं, रूठे वोटरों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं।
गुस्साए वोटरों को मनाने का नया फार्मूला
हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों में अपनाए गए मॉडल को अब बिहार में लागू किया गया है। वरिष्ठ स्वयंसेवक गुस्साए वोटरों की शिकायतें सुनते हैं, उन्हें गुस्सा निकालने का मौका देते हैं। इसके बाद उनकी शिकायतों को दो हिस्सों में बांटा जाता है:
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जो काम तुरंत हो सकते हैं (जैसे सड़क बनवाना, राशन कार्ड बनवाना, पीएम आवास की प्रोसेस शुरू करना)।
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जो काम चुनाव बाद किए जाएंगे।
इस तरह वोटरों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश हो रही है कि उनकी नाराजगी दूर की जाएगी।
100 सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट बनाएगा RSS
RSS बिहार में 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट BJP को देगा। हर सीट से तीन नाम भेजे जाएंगे और उनके मजबूत और कमजोर पक्ष बताए जाएंगे। जहां मौजूदा विधायक कमजोर हैं, वहां नए चेहरे तलाशे जा रहे हैं। विधायक का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया जा रहा है।
जमीनी स्तर पर काम: 100 मीटिंग हर ब्लॉक में
ग्राउंड पर काम कर रहे स्वयंसेवक रोज 5–10 घरों में जाते हैं और लोगों से राम मंदिर, हिंदुत्व, राष्ट्रवाद, गौ-रक्षा, PM किसान योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं पर बातचीत करते हैं। हर ब्लॉक में हर हफ्ते करीब 100 बैठकें हो रही हैं।
RSS का जमीनी प्लान और महिलाओं पर फोकस
RSS की महिला विंग अलग-अलग इलाकों में बैठकों का आयोजन कर रही है। फोकस यह है कि महिलाओं की राय टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति तक में झलके। ग्रामीण इलाकों में जातिवाद और हिंदुत्व, जबकि मुस्लिम बहुल इलाकों में राम मंदिर और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।
जाति जनगणना और OBC कार्ड
RSS और BJP के बीच एक बड़ा मसला था जाति जनगणना। OBC वोट बैंक को साधने के लिए मोदी सरकार ने 2025 में जाति जनगणना का ऐलान कर दिया। सूत्र बताते हैं कि यह फैसला RSS की सहमति और इनपुट के बाद ही हुआ।
मोदी-भागवत के बीच 75 की उम्र का मसला
कुछ महीने पहले यह खबरें आई थीं कि 75 साल की उम्र में मोदी के “रिटायरमेंट” को लेकर RSS और BJP के बीच तनातनी है। कयास लगाए जा रहे थे कि मोदी 2025 में 75 के हो जाएंगे, तो क्या उन्हें “मार्गदर्शक मंडल” की ओर धकेला जाएगा?
लेकिन हाल ही में मोहन भागवत ने साफ कर दिया—
👉 “अब न मैं 75 पर रिटायर होऊंगा और न कोई और।”
इस बयान से एक तरह से मोदी पर मंडराते अनिश्चितता के बादल छंट गए। यानी RSS और मोदी के बीच खटपट की बजाय तालमेल का संदेश गया।
कांग्रेस का “वोट चोरी” और “SIR” विवाद हाशिए पर
दरभंगा में प्रधानमंत्री मोदी को गाली दिए जाने की घटना और उस पर BJP का सड़क से संसद तक प्रदर्शन पहले से ही विपक्ष को घेर रहा है। इसके ऊपर से कांग्रेस की तरफ से उठाए गए “वोट चोरी” और “SIR” जैसे गंभीर मुद्दे अब इस गाली विवाद और RSS की रणनीति के शोर में दबते जा रहे हैं।
ट्रंप टैरिफ और मोदी सरकार की चुनौती
उधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि GST सुधार और टैक्स रियायतों से भारत में खपत बढ़ेगी और अमेरिकी दबाव का असर कम होगा। यानी घरेलू मोर्चे पर मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को “सांत्वना कवच” देने की कोशिश की है।
बिहार चुनाव से पहले RSS की सक्रियता और “75 की उम्र वाली राजनीति” पर नया ट्विस्ट साफ दिखाता है कि मोदी-भागवत समीकरण अब पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के मुद्दे जैसे “वोट चोरी” और “SIR” धीरे-धीरे बैकफुट पर जाते दिख रहे हैं। और बीच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप टैरिफ का दबाव भी है, लेकिन GST सुधार और RSS की जमीनी पकड़ BJP को इस समय बढ़त दिलाने वाले फैक्टर साबित हो सकते हैं।



