AAP के 7 सांसदों ने पलटा राज्यसभा का तख्ता, अब संसद में चलेगी सिर्फ बीजेपी की मर्जी

राघव चड्ढा की अगुवाई में 7 सांसदों ने थामा कमल, बीजेपी की संख्या 106 से बढ़कर पहुंची 113 के पार। *दलबदल कानून को धता बताकर दो-तिहाई बहुमत के साथ हुआ विलय, अब राज्यसभा में 148 सांसदों के साथ 'सुपरपावर' बना एनडीए। *पंजाब के 6 दिग्गजों के पाला बदलने से भगवंत मान की बढ़ी टेंशन, 2027 के चुनाव से पहले 'आप' के किले में लगी बड़ी सेंध।

Raghav chaddha: राघव चड्ढा ने सिर्फ पार्टी ही नहीं छोड़ी, बल्कि राज्यसभा का पूरा ‘नंबर गेम’ ही पलट कर रख दिया है। शुक्रवार को जब राघव अपने साथियों के साथ बीजेपी में शामिल हुए, तो उन्होंने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला जिससे केजरीवाल की ताकत आधी से भी कम रह गई। अब दिल्ली और पंजाब की राजनीति ही नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में भी बीजेपी ‘किंग’ बन गई है। राघव के साथ पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह समेत कुल 7 सांसदों ने पाला बदला है, और सबसे बड़ी बात ये है कि इन पर ‘दलबदल कानून’ भी लागू नहीं होगा क्योंकि इन्होंने दो-तिहाई का आंकड़ा पार कर लिया है।

राज्यसभा में बीजेपी की ‘मौज’

राघव चड्ढा और उनके 6 साथियों के आने से बीजेपी की ताकत में ज़बरदस्त उछाल आया है। राज्यसभा में बीजेपी के पास पहले 106 सांसद थे, जो अब बढ़कर 113 हो गए हैं। अगर एनडीए (NDA) के सहयोगियों और मनोनीत सांसदों को भी जोड़ लिया जाए, तो ये आंकड़ा  148 तक पहुंच जाता है। यानी अब सरकार को कोई भी बिल पास कराने के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। बहुमत के लिए सिर्फ 123 वोट चाहिए, और मोदी सरकार के पास अब 25 सांसद एक्स्ट्रा हैं!

Raghav chaddha: सिर्फ 3 सांसदों पर सिमटी ‘आप’

कल तक राज्यसभा में दहाड़ने वाली आम आदमी पार्टी अब सिर्फ 3 सांसदों (संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल) के भरोसे रह गई है। सबसे बड़ा झटका पंजाब में लगा है, क्योंकि बीजेपी में जाने वाले 7 में से 6 सांसद पंजाब से ही थे। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ये केजरीवाल और भगवंत मान के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। अब पंजाब की गलियों में चर्चा है कि क्या ‘झाड़ू’ के तिनके बिखरने शुरू हो गए हैं?

Raghav chaddha: क्यों नहीं जाएगी इन सांसदों की कुर्सी?

बहुत लोग पूछ रहे हैं कि क्या इनकी सांसदी चली जाएगी? तो जवाब है, ‘बिल्कुल नहीं’। कानून कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में मिलते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। ‘आप’ के 10 में से 7 सांसद चले गए, जो कि 70% होता है। यानी राघव चड्ढा ने पूरी प्लानिंग के साथ ‘संविधान’ के रास्ते से बीजेपी की राह पकड़ी है।

मोदी सरकार अब और भी दमदार

Raghav chaddha: अब राज्यसभा में सुधा मूर्ति, पी.टी. उषा और इलैयाराजा जैसे दिग्गज मनोनीत सांसदों का समर्थन और राघव चड्ढा की नई टीम के साथ आने से सरकार बेहद मजबूत स्थिति में है। अब विपक्ष के लिए किसी भी मुद्दे पर सरकार को घेरना या बिल रोकना नामुमकिन सा हो गया है। राघव, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल और भज्जी पाजी के बीजेपी में जाने से न सिर्फ संख्या बढ़ी है, बल्कि बीजेपी को ‘आप’ के अंदरूनी राज जानने वाले धुरंधर भी मिल गए हैं।

 

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