PM Modi के भाषण पर Supreme Court पहुंचा मामला, कांग्रेस सांसद ने लगाया आचार संहिता उल्लंघन का आरोप

टीएन प्रथापन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका सरकारी चैनलों के ‘दुरुपयोग’ का लगाया आरोप चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग

Politics: प्रधानमंत्री के एक भाषण ने अब कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है। कांग्रेस सांसद ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर चुनावी निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल उस वक्त तेज हो गई, जब 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री Narendra Modi के राष्ट्र संबोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस सांसद T. N. Prathapan ने इस मामले को Supreme Court of India में चुनौती दी है। याचिका के मुताबिक, पीएम मोदी ने रात करीब 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित किया, जो नारी शक्ति वंदन विधेयक से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तुरंत बाद आया था।

 Politics: सरकारी चैनलों पर प्रसारण बना मुद्दा

याचिका में सबसे बड़ा मुद्दा इस बात को बनाया गया है कि इस भाषण का सीधा प्रसारण Doordarshan और Sansad TV पर किया गया। प्रथापन का कहना है कि ये दोनों चैनल सरकारी फंड से चलते हैं, ऐसे में इनका इस्तेमाल किसी राजनीतिक संदेश या आरोप-प्रत्यारोप के लिए नहीं होना चाहिए।

 Politics: आचार संहिता उल्लंघन का आरोप

कांग्रेस सांसद ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि चुनावी माहौल के दौरान सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर विपक्ष पर हमला करना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। उनका कहना है कि सरकार ने अपने नियंत्रण वाले मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया, जो चुनावी नियमों के खिलाफ है।

किन दलों का लिया गया नाम

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में Indian National Congress, All India Trinamool Congress, Dravida Munnetra Kazhagam और Samajwadi Party जैसे दलों का नाम लेकर उनकी आलोचना की। साथ ही इन पार्टियों पर महिला आरक्षण बिल का विरोध करने का आरोप लगाया और जनता से उन्हें जवाबदेह ठहराने की अपील भी की गई।

चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग

 Politics: याचिका में Election Commission of India को निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि इस मामले में उचित कार्रवाई हो सके। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी है, क्योंकि इस फैसले से यह तय हो सकता है कि चुनावी दौर में सरकारी मीडिया के इस्तेमाल की सीमा क्या होगी।

 

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