Video: “मै CM योगी को 25 सितंबर से पहले मार दूंगा” – पिस्टल के साथ युवक का एलान, फिर पुलिस पर 6 राउंड फायरिंग!

मथुरा (माँट तहसील): शुक्रवार दोपहर मथुरा के नगला हरदयाल (माँट तहसील) में एक युवक ने पिस्टल लेकर सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 25 सितंबर से पहले मार डालने की धमकी दी। युवक ने खुद की कनपटी पर पिस्टल रखकर वीडियो भी पोस्ट किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस को सक्रिय कर गया। पुलिस ने तेज़ कार्रवाई कर महज कुछ घंटों में आरोपी सुनील (पुत्र भगवान सिंह) को पिस्तौल और कारतूस के साथ गिरफ़्तार कर लिया।
वायरल हुई धमकी वाली दो वीडियो — क्या कहा युवक ने?
स्थानीय मीडिया और पुलिस के पास पहुँचने वाले दोनों वीडियोज़ का सार इस प्रकार है:
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पहला वीडियो: युवक अर्धनग्न, गले में चेन और हाथ में पिस्टल लिए दिखाई देता है। वह दावा करता है कि उसने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, पर उसकी सुनवाई नहीं हुई। उसने कहा कि उसके पास शिकायत की रसीदें हैं और उसका दर्द अनसुना रहा है। वह बार-बार कहता दिखा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद भी मर जाएगा और सरकार को भी नुकसान पहुंचाएगा।
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दूसरा वीडियो: इसमें युवक और स्पष्ट रूप से धमकी देता है — “25 सितंबर से पहले मैं योगी आदित्यनाथ को मार दूंगा; इसमें 9 गोलियाँ हैं, नौ की नौ सीधे उतार दूंगा।” वीडियो में वह मैगज़ीन निकालकर ओरिजिनल पिस्तौल होने का दावा भी करता है।
वीडियो में युवक ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं — खेत का कर्ज (लगभग 1.5 लाख रुपए), जमीन और स्कूल प्लॉट के मामलों के लंबित मुकदमों — का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसे न्याय नहीं मिला और वह मानसिक रूप से टूट चुका है। उसने पिता की हत्या (भगवान सिंह, 2004) का भी ज़िक्र किया।
यूपी, मथुरा
ये सुनील है!
सुनील ने पिस्टल लेकर वीडियो बनाया था जिसमें उसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की धमकी दी!सुनील ने विडियो में CM योगी को लेकर कहा–
“खुद भी मर जाऊंगा और तुमको भी मार दूंगा”जब मथुरा पुलिस सुनील को पकड़ने पहुंची तो सुनील पिस्टल लेकर घर के छत… pic.twitter.com/CiwA3IgBkN
— Sadaf Afreen صدف (@s_afreen7) September 20, 2025
पुलिस कैसे सक्रिय हुई — घटनाक्रम और गिरफ्तारी
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही सुरक्षा एजेंसियाँ और स्थानीय पुलिस सक्रिय हुईं।
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एक घंटे के अंदर वरिष्ठ अफसरों ने युवक की लोकेशन का पता लगाकर बाइक और पैदल पुलिस फोर्स भेजी।
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पुलिस जब युवक के घर पहुंची तो वह पिस्टल लेकर कमरे में बंद हो गया। कुछ देर बाद वह बाहर निकला और छत पर चढ़ गया; वहां वह पड़ोसी छतों तक घूमता रहा और पुलिस को धमकियाँ देता रहा।
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उसने कार्रवाई के दौरान 6 बार हवा में फायर भी किया — स्थानीय लोगों और पुलिस के बयानों के अनुसार।
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करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया; उसके कब्जे से पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए।
एसपी देहात सुरेश रावत ने बताया कि वायरल धमकी वीडियो के आधार पर मुक़दमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ़्तार किया गया है। उनकी दिशा-निर्देशों के मुताबिक आरोपी की मांगों, मानसिक स्थिति और वायरल सामग्री की पूरी जांच की जा रही है। आवश्यक हुआ तो काउंसलिंग और विशेष टीम की मदद ली जाएगी।
स्थानीय बयान और संदर्भ: परिवार-परिस्थितियाँ और मानसिक स्वास्थ्य का संकेत
स्थानीय लोग बताते हैं कि सुनील लंबे समय से मानसिक तनाव में था और अक्सर अपनी परेशानियों के बारे में रोया करता था। लेख में दिए तथ्यों के अनुसार:
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सुनीत के पिता भगवान सिंह की 2004 में गोली मारकर हत्या हुई थी।
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सुनील के चार भाई हैं और उसकी शादी नहीं हुई है।
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उसने जमीन/प्लॉट व कर्ज संबंधी कई बार कोर्ट/शिकायतें दर्ज करने का दावा किया, परन्तु उसे संतोषजनक न्याय नहीं मिला होने का आरोप लगाया।
ये पृष्ठभूमि पुलिस-छानबीन और आगे की कानूनी प्रक्रिया में महत्व रखेगी; साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप की आवश्यकता पर भी सवाल उठाती है।
क्या हुई कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा तैयारी?
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वायरल धमकी के आधार पर आपराधिक मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है।
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अवैध आग्नेयास्त्र बरामद करने के संबंध में अलग धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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सुरक्षा एजेंसियाँ और स्थानीय प्रशासन 25 सितंबर तक संवेदनशीलता के साथ सतर्क बताए जा रहे हैं। आवश्यक पाए जाने पर अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की जा सकती है।
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पुलिस ने कहा है कि आरोपी की मांगों और दावों की सत्यता जाँचकर आगे विधिक कार्रवाई और काउंसलिंग पर निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक शख्सियतों को धमकी — सुरक्षा और न्याय की चुनौतियाँ
मुख्यमंत्रियों और सार्वजनिक पदाधिकारियों के प्रति खुलेआम जान से मारने की धमकी गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा मामला है। ऐसे मामलों में:
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व्यापक और त्वरित पुलिस सूचना-संचालन (इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग) महत्वपूर्ण होता है।
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साथ ही पीड़ित/आरोपी की मानसिक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक सहायता भी आवश्यक है।
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वहीं, अगर आरोपों में जमीन-संबंधी न्याय न मिलना भी सत्य है, तो प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों के निराकरण व पहुंच सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर भी ध्यान देना चाहिए — ताकि ऐसा निराशाजनक बर्ताव उभरने ही न पाए।



