बड़ी खबर: अपर्णा यादव की माँ समेत 5 अफसरों पर FIR, मुलायम सिंह यादव की थीं समधन.. लगे गंभीर आरोप!

लखनऊ: राजधानी लखनऊ की बहुचर्चित प्रियदर्शनी-जानकीपुरम योजना में भूखंड आवंटन घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की मां और तत्कालीन LDA संपत्ति अधिकारी अंबी बिष्ट समेत पांच अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई विजिलेंस की लंबी जांच के बाद हुई है, जो 2016 से चल रही थी।

अंबी बिष्ट समेत पांच अफसरों पर मुकदमा दर्ज

विजिलेंस जांच में पाया गया कि तत्कालीन संपत्ति अधिकारी अंबी बिष्ट ने रजिस्ट्री और सेल डीड पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं, अनुभाग अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने कब्जा पत्र जारी किए और उपसचिव देवेंद्र सिंह राठौड़ ने आवंटन पत्र पर साइन किए।
इसके अलावा वरिष्ठ कास्ट अकाउंटेंट सुरेश विष्णु और अवर वर्ग सहायक शैलेंद्र कुमार गुप्ता पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूखंडों का गलत मूल्यांकन करने का आरोप है।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला से हस्ताक्षर की पुष्टि

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सभी दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों की पुष्टि FSL (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) से कराई गई, जो सही पाई गई। अब शासन ने IPC की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया है।

अपर्णा यादव की मां हैं अंबी बिष्ट

अंबी बिष्ट, भाजपा नेता और यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की मां हैं। अंबी बिष्ट सितंबर 2024 में LDA से सेवानिवृत्त हुई थीं। वह नगर निगम में कर अधिकारी के तौर पर भी पदस्थ रही थीं। एफआईआर की कार्रवाई ने अब इस मामले को राजनीतिक रंग भी दे दिया है, क्योंकि अपर्णा यादव अक्सर विपक्ष पर तीखे बयान देती रही हैं।

प्रियदर्शनी-जानकीपुरम योजना में हेरफेर का खुलासा

प्रियदर्शनी-जानकीपुरम योजना लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की एक महत्वाकांक्षी परियोजना थी, जिसे शहर के उत्तरी हिस्से में आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था।
2016 की जांच में पता चला कि इस योजना के कई भूखंडों के आवंटन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। कब्जा पत्र, आवंटन पत्र और रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा कर नियमों की अनदेखी की गई थी।

ग्रीन बेल्ट और प्लेग्राउंड तक को बेच डाला

जांच में यह भी सामने आया कि LDA अफसरों ने भूमाफिया से मिलीभगत कर ग्रीन बेल्ट और प्ले ग्राउंड तक को प्लॉट बनाकर बेच दिया। 2004 में मामला सामने आने पर CBI ने जांच शुरू की थी। इसमें कम से कम 1.75 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज किया गया।

नाम ट्रांसफर फीस और फर्जी आवंटन

2008 में कैसरबाग कोतवाली में दर्ज तहरीर के अनुसार, पूर्व संयुक्त सचिव सहित 14 अफसरों की तैनाती के दौरान 177 भूखंडों का फर्जी आवंटन किया गया।
इसमें 10 प्रतिशत नाम ट्रांसफर फीस भी वसूली गई। इतना ही नहीं, पार्क और ग्रीन एरिया को भी प्लॉट बनाकर बेच दिया गया था।

CBI कोर्ट ने पहले ही सुनाई थी सजा

CBI की विशेष अदालत पहले ही इस मामले में कई अफसरों को सजा सुना चुकी है। LDA के तत्कालीन संयुक्त सचिव आरएन सिंह को 3 साल की सजा और क्लर्क राज नारायण द्विवेदी को 4 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई थी।
इसके अलावा महेंद्र सिंह सेंगर और दिवाकर सिंह को भी 3-3 साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

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