बड़ी खबर: ‘I Love मोहम्मद’ पर योगी के एक्शन से BJP नेता आगबबूला, कहा – “ऐसे ही चला तो इस्तीफा दे दूंगा”

उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर लेकर निकले जुलूसों पर प्रशासन की कार्रवाई ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। इस विवाद पर बीजेपी के नेता जहाँज़ैब सिरवाल ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अगर भरोसा बहाल नहीं हुआ तो वे इस्तीफ़े तक का विकल्प देखेंगे। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा-और-कानून के मद्देनज़र कई जगह कार्रवाई की सूचना दी है।
बरेली, कानपुर और अन्य जगहों पर कार्रवाई
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक़ बरेली, कानपुर सहित अन्य स्थानों पर ‘I Love Muhammad’ वाले पोस्टर के साथ निकाले गए जुलूसों पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया। कानपुर में 24 लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने और कुल मिलाकर कुछ इलाकों में कुल 68 गिरफ्तारी की सूचनाएं सामने आईं। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक शांति भंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
जहाँज़ैब सिरवाल का रुख — इस्तीफे की चेतावनी
भाजपा नेता जहाँज़ैब सिरवाल ने कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सरकार की यह रवैया “सबका साथ” के सिद्धांत के खिलाफ जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति में भरोसा बहाल नहीं हुआ और समुदायों के साथ संवाद स्थापित नहीं हुआ तो वे इस्तीफ़े का विकल्प देखेंगे। सिरवाल ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनुचित कृत्य के खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, पर व्यापक कार्रवाई से समुदायों के बीच भरोसा डगमगा सकता है।
कौन हैं भाजपा नेता जहाँज़ैब सिरवाल ?
जहाँज़ैब सिरवाल (Dr. Jahanzaib Sirwal) जम्मू-कश्मीर राजनीति के जाने-माने चेहरे हैं जिन्हें पहले कांग्रेस का राष्ट्रीय/राज्यस्तरीय कार्यकर्ता और प्रवक्ता के रूप में जाना जाता था। अप्रैल 2024 में वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें जम्मू-संवर्धन में सक्रिय नेता के रूप में शामिल किया — 2024 के J&K विधानसभा चुनावों में उन्हें भाजपा की चुनाव प्रबंधन समिति में को-इंचार्ज (सांख्यिकी/स्टैटिस्टिक्स) का दायित्व भी दिया गया था। वे अब भाजपा के जम्मू-काश्मीर इकाई के प्रमुख पैनल/फेसों में गिने जाते हैं और सामाजिक-राजनीतिक मामलों पर खुलकर बोलते रहे हैं।
योगी-सरकार व प्रशासन का रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सार्वजनिक आयोजन और रैलियों में नियमों का पालन आवश्यक है। प्रशासन का तर्क है कि जिन समूहों ने शांति भंग करने की कोशिश की, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है ताकि व्यापक दंगा-विरोधी स्थिति रोकी जा सके।



