गया एयरपोर्ट के Code ‘GAY’ से BJP सांसद को दिक्कत, कहा – “धार्मिक भावनाए आहात..” LGBTQ समुदाय भड़का

गया, बिहार। गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कोड ‘GAY’ को लेकर इन दिनों सियासत और समाज में बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद डॉ. भीम सिंह ने इस कोड को बदलने की मांग की है, जिसे लेकर एलजीबीटीक्यू+ समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह मुद्दा अब एक गंभीर विमर्श का विषय बन गया है जिसमें धार्मिक भावनाओं, सामाजिक अस्मिता और आधुनिक पहचान—तीनों का टकराव दिख रहा है।

BJP सांसद भीम सिंह ने उठाई कोड बदलने की मांग

बिहार के औरंगाबाद से भाजपा सांसद डॉ. भीम सिंह ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से आग्रह किया है कि गया एयरपोर्ट का IATA कोड ‘GAY’ बदला जाए। उनका तर्क है कि यह कोड एक धार्मिक नगरी गया के गौरव और पहचान के अनुरूप नहीं है। सांसद का कहना है कि “गया भगवान बुद्ध की तपोभूमि और मोक्ष की धरती है। GAY शब्द आज के दौर में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय का प्रतीक बन चुका है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।”

सांसद ने क्या प्रस्तावित किया नया कोड?

भीम सिंह ने ‘GAY’ की जगह ‘YAG’ (यानि GAY को उलटकर) को प्रस्तावित किया है। उनका दावा है कि इससे गया का नाम भी बना रहेगा और धार्मिक या सामाजिक टकराव की स्थिति नहीं बनेगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि कोड को जल्द बदला जाए ताकि गया आने वाले विदेशी पर्यटक भी असहज महसूस न करें।

एलजीबीटीक्यू+ समुदाय का विरोध

भीम सिंह के बयान पर LGBTQ+ समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। सामाजिक कार्यकर्ता ग्रेस बानो ने कहा, “सांसद का यह बयान न सिर्फ समुदाय के अस्तित्व का अपमान है, बल्कि यह बताता है कि हमारे नेता अब भी शब्दों से डरते हैं, पहचान से नहीं। GAY कोड से किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं?”

विमानन नियमों के अनुसार कोड बदलना आसान नहीं

IATA (International Air Transport Association) के अनुसार, एयरपोर्ट कोड बदलना एक जटिल प्रक्रिया है। एक बार कोड तय हो जाने के बाद उसे केवल बेहद खास परिस्थितियों में ही बदला जाता है। सुरक्षा, भ्रम या अंतरराष्ट्रीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ही कोड परिवर्तन संभव होता है। ‘GAY’ कोड गया एयरपोर्ट को वर्ष 2002 में मिला था और तब से यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ लिया है। एक ओर जहां कुछ लोग सांसद की मांग का समर्थन कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे “अप्रासंगिक राजनीति” बता रहे हैं। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #GayaAirport ट्रेंड कर रहा है और दोनों पक्षों की तरफ से तीखी बहस हो रही है।

क्या कोड बदलने से होगी पहचान की रक्षा?

यह सवाल भी अब खड़ा हो रहा है कि क्या एयरपोर्ट कोड बदलने से किसी शहर की धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान की रक्षा होती है? गया जैसे शहर, जिसकी पहचान मोक्षधाम और बौद्ध तीर्थ के रूप में है, क्या उसे तीन अक्षरों के कोड से जोड़ा जाना चाहिए? यह बहस अब केवल एक कोड की नहीं, बल्कि आधुनिक भारत में पहचान और परंपरा के संतुलन की बन गई है।

 

Related Articles

Back to top button