VIDEO: दूध से नहलाया, सिक्कों से तौला — छपरा में खेसारी लाल का फिल्मी अंदाज़ में स्वागत
राजद प्रत्याशी खेसारी लाल यादव का छपरा में समर्थकों ने दूध से नहलाकर और सिक्कों से तोलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा, “मैं नाचने वाला हूं, पर अब बीजेपी को हराऊंगा,” और वादा किया कि उनकी राजनीति धर्म या जाति नहीं, विकास पर आधारित होगी।

छपरा: भोजपुरी सुपरस्टार और राजद प्रत्याशी खेसारी लाल यादव का छपरा में चुनावी आगमन किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। नामांकन दाखिल करने के बाद जब वे समर्थकों के बीच पहुंचे, तो लोगों ने उन्हें दूध से नहलाया और सिक्कों से तोला। करीब 200 लीटर दूध और 5 लाख रुपये के सिक्कों से हुआ यह स्वागत उनके बढ़ते जनसमर्थन और लोकप्रियता का प्रतीक बन गया। विवाह भवन परिसर में हजारों की भीड़ जुटी रही, जिसने मोबाइल कैमरों से यह नजारा कैद कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
Khesari Lal Yadav ने गरीबी देखी है, एक गरीब परिवार का लड़का आज इस मुकाम तक अपनी मेहनत के बदौलत पहुंचा है,
जब ये नेता नहीं थे तो कई बच्चों को गोद लिया जब बिहार में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुआ तो वहा मदद पहुंचाई,
जनता जानती है अगर यह लड़का जीत जाएगा तो विकाश जरूर करेगा,
यही तो खेसारी… pic.twitter.com/ua9otZeCBP— Gautam (@GautamBhartiye) October 24, 2025
“मैं हूं नाचने वाला, लेकिन अब बीजेपी को हराएगा”
खेसारी लाल यादव ने समर्थकों का उत्साह देखकर भावुकता से कहा कि जनता का यह प्यार उनके लिए आशीर्वाद जैसा है। उन्होंने कहा, “मैं गरीब घर का बेटा हूं, बर्तन मांजे हैं, इसलिए गरीबों का दर्द जानता हूं।” डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए “नाचने वाला” तंज का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “हाँ, मैं नाचने वाला हूं, लेकिन अब यह नाचने वाला बीजेपी को हराएगा।” उनके इस बयान पर भीड़ ने तालियों से उनका समर्थन जताया।
धर्म और जाति से ऊपर विकास की राजनीति
खेसारी लाल ने मंच से स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति जाति या धर्म पर नहीं, बल्कि काम पर आधारित होगी। उन्होंने कहा, “मैं हिंदू–मुस्लिम नहीं करूंगा, सिर्फ काम करूंगा।” उन्होंने बिहार में विकास की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे छपरा को नई दिशा देने और युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने लोगों से वादा किया कि वे राजनीति में साफ–सुथरी सोच और ईमानदारी के साथ बदलाव लाने आए हैं।
जनता के प्यार में डूबा छपरा
खेसारी लाल का यह स्वागत केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता और जनभावनाओं का प्रतीक था। दूध और सिक्कों से किया गया अभिनंदन बिहार की राजनीति में एक अनोखा दृश्य बन गया है।



