16 साल की पत्नी से संबंध रेप नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग पत्नी से संबंध बनाने के मामले में आरोपी इस्लाम को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार 15 वर्ष की उम्र में विवाह वैध है। पीड़िता की सहमति और गवाही के आधार पर निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया गया।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अपहरण, जबरन शादी और नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध के आरोप में दोषी ठहराए गए इस्लाम को बरी कर दिया। अदालत ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पीड़िता की शादी 16 साल की उम्र में वैध थी।
‘पति–पत्नी के संबंध अपराध नहीं’ – कोर्ट
सिंगल बेंच के जस्टिस अनिल कुमार ने कहा कि घटना के समय पीड़िता और इस्लाम पति–पत्नी के रूप में रह रहे थे, इसलिए उनके बीच शारीरिक संबंध को अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि विवाह के बाद सहमति से बने संबंधों को दंडनीय नहीं ठहराया जा सकता।
पीड़िता की गवाही बनी अहम आधार
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता की गवाही को अहम माना। पीड़िता ने कहा था कि वह अपनी मर्जी से इस्लाम के साथ गई थी और उसके साथ विवाह किया था। अदालत ने इसे सहमति का संकेत मानते हुए इस्लाम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
1973 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 1973 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ‘ले जाने’ और ‘साथ जाने’ में कानूनी अंतर होता है। यदि कोई लड़की अपनी इच्छा से किसी के साथ जाती है, तो इसे अपहरण नहीं माना जा सकता। साथ ही, मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार 15 वर्ष की उम्र विवाह के लिए वैध मानी जाती है।



