‘भगवान की कृपा से अमीर बनी,’ बोलीं हिसार MLA सावित्री जिंदल, अब शहर की पार्किंग और जाम की समस्या सुलझाने में जुटीं

भारत की सबसे अमीर महिला और हिसार की निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने कहा कि उनकी संपत्ति भगवान की कृपा से है। 39.6 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ वे भारत की तीसरी सबसे धनी और विश्व स्तर पर 48वें स्थान पर हैं। जिंदल ने हिसार में तीन नई पार्किंग और अन्य विकास कार्यों की घोषणा की।

हिसार: हरियाणा के हिसार की निर्दलीय विधायक और ओपी जिंदल समूह की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल ने कहा कि उनकी संपन्नता भगवान की कृपा से है। जब उनसे पूछा गया कि भारत की सबसे अमीर महिला कहलाने पर कैसा लगता है, तो वे मुस्कुराते हुए बोलीं—“यह सब भगवान की कृपा है, जब वह कृपा करते हैं तो सबकुछ संभव हो जाता है।”

दिवाली के मौके पर सावित्री जिंदल हिसार स्थित जिंदल हाउस पहुंचीं, जहां उन्होंने लोगों से मुलाकात की, शुभकामनाएं दीं और शहर की समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शहर की सबसे बड़ी परेशानी जाम और पार्किंग की है, जिसे दूर करने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं।

फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2025 के अनुसार, सावित्री जिंदल अब भारत की सबसे अमीर महिला हैं और मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी के बाद देश की तीसरी सबसे धनी शख्सियत बन गई हैं। उनकी कुल संपत्ति 39.6 अरब डॉलर है और वे दुनिया की सबसे अमीर हस्तियों की सूची में 48वें स्थान पर हैं। पिछले छह महीनों में उनकी संपत्ति में 4.1 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।

शहर में बनेंगी तीन बड़ी पार्किंग

सावित्री जिंदल ने बताया कि शहर में जाम की समस्या को खत्म करने के लिए तीन प्रमुख जगहों पर बड़ी पार्किंग बनाई जा रही है—सिटी थाने के सामने, धोबीघाट और राजगुरु मार्केट के पास। इन पार्किंग स्थलों के बनने के बाद शहर में वाहनों की अव्यवस्था काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जल निकासी और सीवरेज सिस्टम को सुधारने पर भी काम जारी है। बारिश के कारण टूटी सड़कों की मरम्मत तेज़ी से कराई जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हिसार के विकास कार्य प्राथमिकता पर रहेंगे।

हरियाणा की चौथी निर्दलीय महिला विधायक

करीब एक साल पहले विधानसभा चुनाव में सावित्री जिंदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। वे हरियाणा विधानसभा के इतिहास में चौथी निर्दलीय महिला विधायक हैं। इससे पहले शारदा रानी (1982), कुमारी मेधवी (1987) और शकुंतला भगवाड़िया (2005) यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।

सावित्री जिंदल का यह सफर उद्योग जगत से राजनीति तक एक प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने जनसेवा को नया आयाम दिया है।

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