CJI गवई पर हमले की कोशिश करने वाले वकील का ‘नूपुर शर्मा’ से क्या संबंध? क्यों कहा – “इस मामले से मैं बहुत दुखी हूं”
CJI गवई को जूता मारने वाले वकील का 'नूपुर शर्मा' से क्या संबंध? क्यों कहा - "इस मामले से मैं बहुत दुखी हूं"

सुप्रीम कोर्ट की बेंच की ओर जूता फेंकने के प्रयास के बाद आरोपी वकील राकेश किशोर ने मीडिया के सामने विस्तृत बयान दिया। उनके हर कथन ने घटना की पृष्ठभूमि, उनकी नाराज़गी और अदालत के रवैये पर उठाए गए सवालों को उजागर किया — नीचे हम क्रमवार और साफ़ भाषा में उनकी हर बात का मतलब समझाते हैं।
कौन हैं आरोपी ?
राकेश किशोर सुप्रीम कोर्ट बार में पंजीकृत वकील बताए जा रहे हैं (रजिस्ट्रेशन: 2011)। घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें कोर्ट परिसर में पकड़ा और करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद, किसी औपचारिक प्राथमिकी के अभाव में, उन्हें छोड़ा गया और उनका जूता लौटा दिया गया। राकेश ने पूछताछ के समय और बाद में मीडिया से खुलकर बात की।
“16 सितंबर की टिप्पणी से मैं बहुत आहत हुआ”
राकेश ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उनकी कार्रवाई की पृष्ठभूमि 16 सितंबर को हुई उस टिप्पणी से जुड़ी है जिसमें चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने खंडित विष्णु प्रतिमा के मामले पर कहा था: “जाओ और भगवान से खुद करने को कहो।” राकेश के अनुसार वह टिप्पणी याचिकाकर्ता का मज़ाक उड़ाने जैसी दिखी और इससे वे गहराई से आहत हुए।
“याचिकाकर्ता का मज़ाक उड़ाया गया”
राकेश ने कहा कि अदालत ने उस याचिका को सिर्फ़ खारिज ही नहीं किया, बल्कि याचिकाकर्ता के प्रति तंज़िया रुख अपनाया गया। उनके अनुसार याचिकाकर्ता एक आम नागरिक था और उसे ऐसे ही तरीके से ट्रीट करना ठीक नहीं था। यही भावना उनकी नाराज़गी का मूल कारण रही।
“डबल स्टैंडर्ड” का आरोप — अलग मामलों में अलग रवैया क्यों?
राकेश ने न्यायपालिका के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में अदालतें बहुत संवेदनशील होकर बड़े कदम उठा लेती हैं, जबकि सनातन से जुड़े मामलों पर अनावश्यक तंज दिखाया जाता है। उन्होंने समान व्यवहार की मांग की और इसे ‘डबल स्टैंडर्ड’ बताया।
नूपुर शर्मा का जिक्र — संदर्भ क्या था?
राकेश ने नूपुर शर्मा के मामले का भी संदर्भ दिया और कहा कि जब कुछ मामलों में प्रतिक्रिया तेज होती है तब न्यायालय सक्रिय होता है, वहीं सनातन से जुड़े मामलों में कुछ और रूख दिखाई देता है — यह उनके बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का जिक्र करते हुए कहा, ‘ऐसे ही नूपुर शर्मा का जब मामला आया, तब कोर्ट ने कह दिया आपने माहौल खराब कर दिया। यह सब तो कहते हैं, रोक लगाते हैं ठीक, लेकिन जब बात हमारे सनातन धर्म की आती है, फिर चाहे जल्लीकट्टू हो या दही हांडी की ऊंचाई तय करनी हो तो उसपर वह जरूर ऐसा कोई न कोई ऑर्डर पास करते चली आ रही है सुप्रीम कोर्ट जिससे मैं बहुत दुखी हूं।”
“मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता”
मीडिया के सामने राकेश ने यह भी कहा कि वे पढ़े-लिखे हैं, गोल्ड-मेडलिस्ट हैं, शराब या ड्रग्स के आदी नहीं हैं और किसी अलोकतांत्रिक समूह के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी हरकत भावनात्मक आहत होने का रिएक्शन था, न कि कोई शाह-सर-हिंसा-प्रेरित कदम।
भावनात्मक रुख — अफ़सोस नहीं, डर नहीं
राकेश ने दो स्पष्ट भावनात्मक बयान दिए: (1) उन्हें अपने कदम पर अफ़सोस नहीं है और (2) उन्हें डर नहीं है। इन शब्दों से उनकी ठोस नीयत और घटनाक्रम को लेकर आत्म-विश्वास जाहिर होता है।
कोर्ट का रुख — CJI बी.आर. गवई ने क्या कहा?
घटना के बाद चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने अदालत में उपस्थितों से अनुरोध किया कि वे घबराएँ नहीं और सुनवाई जारी रखें। CJI ने कहा: “मैं भी परेशान नहीं हूँ, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता।” उनकी यह बात कोर्ट में माहौल को सामान्य बनाए रखने की अपील थी।
सुरक्षा-प्रश्न और आगे की संभावना
इस घटना ने कोर्ट के भीतर सुरक्षा, शिष्टाचार और वकील–न्यायपालिका सम्बन्धों पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रेस में आई रिपोर्टों के अनुसार घटना के बाद सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। साथ ही, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं ने मामले की नज़ाकत बढ़ाई है।



