“तेरी बेटी और भाभी में बहुत गर्मी है..”, पागल आशिक जैसे लड़की के पीछे पड़ा SDM, CM ने निकाल दी आशिकी!

मुरैना, मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना जिले के सबलगढ़ में तैनात उपजिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अरविंद माहौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कदम महिला से अभद्र व्यवहार और नियमविरुद्ध पटवारियों के तबादले करने के गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।

महिला से अभद्र व्यवहार और धमकी: गंभीर आरोप

पीड़ित परिवार ने शिकायत की कि एसडीएम अरविंद माहौर ने उनकी बेटी का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था और पिछले एक साल से देर रात अश्लील फोन करने लगे। जब युवती ने फोन उठाना बंद किया, तो एसडीएम ने परिवार के अन्य सदस्यों को धमकाना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने महिला के देवर की दुकान पर जाकर धमकी दी कि “तेरी बेटी और तेरी भाभी में बहुत गर्मी है, झूठे केस में फंसा दूंगा।” पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक आत्महत्या तक कर सकते हैं।

वीडियो साक्ष्य और कलेक्टर की शिकायत

महिला ने जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर अंकित अस्थाना को एसडीएम के अभद्र व्यवहार का वीडियो भी सौंपा। वीडियो में एसडीएम महिला के देवर से आपत्तिजनक बातें करते हुए दिख रहे हैं। इस वीडियो के आधार पर कलेक्टर ने एसडीएम को मुख्यालय अटैच कर दिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेजी।

मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई और निलंबन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसडीएम अरविंद माहौर को तत्काल निलंबित कर दिया। साथ ही, उन्होंने चंबल कमिश्नर को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ट्वीट के माध्यम से लिखा:
“मुरैना जिले के सबलगढ़ के एसडीएम अरविंद माहौर के विरुद्ध महिला से अभद्र व्यवहार और नियमविरुद्ध पटवारियों के तबादले की गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। तत्काल निलंबन के निर्देश दिए गए हैं।”

नए एसडीएम की नियुक्ति

कलेक्टर अंकित अस्थाना ने बताया कि निलंबन के बाद एसडीएम अरविंद माहौर को मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह मेघा तिवारी को सबलगढ़ का नया एसडीएम नियुक्त किया गया है। कलेक्टर ने चंबल कमिश्नर को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

प्रशासनिक पारदर्शिता और महिला सुरक्षा पर संदेश

यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठाती है और राज्य सरकार की महिला सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता के प्रति गंभीर दृष्टिकोण को उजागर करती है। मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे मामलों में कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है।

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