Miss UP बनी ‘अखिलेश दुबे गैंग’ का सबसे बड़ा हथियार, कोड नेम था – ‘विषकन्या’, कई बड़ी हस्तियां बनी शिकार !

कानपुर के चर्चित अखिलेश दुबे गैंग का खुलासा पुलिस की SIT जांच में लगातार नए-नए राज खोल रहा है। झूठे रेप केस दर्ज कराकर ब्लैकमेलिंग और रंगदारी का खेल खेलने वाला यह नेटवर्क न केवल गरीब बस्तियों की महिलाओं का इस्तेमाल करता था, बल्कि इसमें मिस यूपी रह चुकी एक युवती भी अहम भूमिका निभा रही थी। वह युवती गैंग में शामिल होकर ‘विषकन्या’ के नाम से मशहूर हुई और करोड़ों की वसूली की कहानियों का हिस्सा बनी।

लड़की का कबूलनामा: पैसे के लालच में झूठे केस

बर्रा थाने में भाजपा नेता रवि सतीजा के खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज कराने वाली लड़की ने पुलिस कस्टडी में चौंकाने वाला कबूलनामा किया है। उसने बताया कि वकील टोनू यादव उर्फ शैलेंद्र ने रुपए का लालच देकर उसे अखिलेश दुबे से मिलवाया था। एक झूठे केस के बदले उसे 50 हजार से 2 लाख रुपए तक मिलते थे और गारंटी दी जाती थी कि पुलिस कुछ नहीं करेगी।
लड़की के अनुसार, बस्ती की कई महिलाएं इस धंधे में लिप्त थीं और जब SIT ने जांच शुरू की तो टोनू ने 10 से ज्यादा महिलाओं को छत्तीसगढ़ भेज दिया।

गैंग में शामिल हुई मिस यूपी, बनी ‘विषकन्या’

SIT जांच में सामने आया कि अखिलेश दुबे ने मिस यूपी रह चुकी एक युवती को भी पैसे और करियर का झांसा देकर अपने गैंग में शामिल किया। यही युवती बाद में दुबे की सबसे खास बन गई और उसे गैंग में ‘विषकन्या’ नाम मिला।
उसने अखिलेश के कहने पर दो लोगों से शादी की और फिर उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर करोड़ों रुपए वसूले।

होटल मालिक से 2.50 करोड़ की वसूली

मिस यूपी उर्फ विषकन्या ने सबसे पहले अपने दफ्तर के सामने स्थित एक होटल मालिक पर झूठा रेप केस दर्ज कराया। इस केस में दबाव डालकर 2.50 करोड़ रुपए वसूले गए।
इसके बाद अचानक वह युवती गायब हो गई। होटल मालिक ने अखिलेश और मिस यूपी के खिलाफ किदवई नगर थाने में केस दर्ज कराया है। अब पुलिस इस विषकन्या की तलाश में जुटी है।

अखिलेश का नेटवर्क और पुलिस से करीबी

जांच में सामने आया कि अखिलेश दुबे ने जमीन की फर्द लिखने (रिकॉर्ड तैयार करने) के बहाने पुलिस अधिकारियों से नजदीकियां बढ़ाईं। कॉन्स्टेबल से लेकर एसपी स्तर तक उसके रिश्ते हो गए। इन्हीं नजदीकियों का फायदा उठाकर उसने लोगों को झूठे रेप केस में फंसाया, प्रॉपर्टी कब्जाई और रंगदारी वसूली।
SIT के मुताबिक, दुबे ने अब तक 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियों पर कब्जा किया।

54 केसों में SIT की जांच, सबसे बड़ा हथियार झूठे रेप केस

पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने बताया कि अब तक की जांच में 54 झूठे रेप केस सामने आए हैं। इनमें से 10 से 12 सीधे अखिलेश दुबे से जुड़े थे। बड़े लोगों को फंसाना, प्रॉपर्टी विवाद सुलझाना और डर का माहौल बनाना ही उसका मकसद था।
इसी कड़ी में भाजपा नेता रवि सतीजा पर भी झूठा केस दर्ज कराया गया था। बाद में SIT की जांच में सच सामने आया।

अखिलेश की अदालत और साम्राज्य

अखिलेश दुबे खुद को वकील कहता था, लेकिन उसने कभी कोर्ट में बहस नहीं की। उसके दफ्तर में ही ‘दरबार’ लगता था और पुलिस अफसरों के केस की लिखा-पढ़ी वहीं होती थी।
अपनी ताकत बढ़ाने के लिए उसने एक न्यूज चैनल शुरू किया, वकीलों का सिंडीकेट बनाया और पुलिस अफसरों तक को शामिल कर लिया। कानपुर में स्कूल, गेस्ट हाउस, शॉपिंग मॉल और जमीनों के कारोबार में बड़े-बड़े बिल्डर उसके साथ जुड़े।

मेरठ से कानपुर तक का सफर

अखिलेश दुबे मूल रूप से कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला है। उसके पिता सेंट्रल एक्साइज में कॉन्स्टेबल थे। मेरठ में रहने के दौरान दुबे की सुनील भाटी गैंग से भिड़ंत हो गई और वह भागकर कानपुर आ गया।
1985 में उसने किदवई नगर में रहना शुरू किया और धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियों में शामिल होकर बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया।

पुलिस कमिश्नर की अपील

पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि अब दुबे से डरने की जरूरत नहीं है। सभी पीड़ितों को सामने आकर रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए, तभी दुबे और उसके गैंग पर कड़ी कार्रवाई संभव है।

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