कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक? सुदर्शन रेड्डी ने जज रहते हुए UPA सरकार को दिए थे कई झटके, फिर भी बनाया VP उम्मीदवार

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव की जंग इस बार बेहद दिलचस्प हो गई है। इंडिया गठबंधन (INDIA) ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। खास बात यह है कि जस्टिस रेड्डी वही जज हैं जिन्होंने यूपीए सरकार को उसके कार्यकाल में कई बड़े मामलों में करारे झटके दिए थे। अब विपक्ष का उन्हें उम्मीदवार बनाना एक बेहद चौंकाने वाली लेकिन सोची-समझी चाल मानी जा रही है।
2G स्पेक्ट्रम घोटाले पर सख्त रुख
यूपीए सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बने 2G स्पेक्ट्रम घोटाले की सुनवाई में जस्टिस रेड्डी ने कई बार सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा था कि “प्राकृतिक संसाधन जनता की संपत्ति हैं, इन्हें सरकार की मर्जी से कुछ गिने-चुने लोगों को नहीं सौंपा जा सकता।” उनकी इस टिप्पणी ने यूपीए को घोटाले के मुद्दे पर और ज्यादा घेरा।
ब्लैक मनी पर तीखी टिप्पणी
ब्लैक मनी को लेकर जस्टिस रेड्डी ने यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि “आखिर काला धन वापस लाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?” कोर्ट के आदेशों के बाद ही सरकार को ब्लैक मनी की जांच के लिए एसआईटी (Special Investigation Team) गठित करनी पड़ी। यह फैसला यूपीए के लिए बड़ा सिरदर्द बना।
सरकारी नीतियों पर करारा प्रहार
जस्टिस रेड्डी ने कई बार सरकारी कामकाज पर तीखी टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने कहा था कि “लोकतांत्रिक सरकार को सिर्फ दिखावटी पारदर्शिता से काम नहीं चलेगा, उसे जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा।” उनकी इस सख्त छवि ने उन्हें एक निष्पक्ष और बेबाक जज के रूप में पहचान दिलाई।
अंबानी बंधुओं के गैस विवाद में भी अहम भूमिका
जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी ने कॉरपोरेट जगत को भी बड़े स्तर पर प्रभावित किया था। गैस की कीमतों को लेकर मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच चले लंबे विवाद में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई। उस समय रिलायंस इंडस्ट्रीज (मुकेश अंबानी) और एडीएजी समूह (अनिल अंबानी) के बीच गैस सप्लाई समझौते को लेकर टकराव था। जस्टिस रेड्डी ने दोनों भाइयों को बातचीत की मेज पर बैठने के लिए मजबूर किया और अंततः अपने फैसले में बड़े भाई मुकेश अंबानी के पक्ष में फैसला सुनाया। यह मामला उस दौर में न सिर्फ कॉरपोरेट बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बेहद चर्चा में रहा था।
विपक्ष का बड़ा दांव
ऐसे पूर्व जज को उम्मीदवार बनाना, जिसने यूपीए को सबसे ज्यादा परेशान किया था, विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इंडिया गठबंधन यह संदेश देना चाहता है कि उपराष्ट्रपति का पद सिर्फ राजनीतिक समीकरणों का नहीं, बल्कि ईमानदारी और साख वाले चेहरों का पद होना चाहिए।
राजनीतिक चाल का संकेत
हालाँकि यह भी सच है कि जस्टिस रेड्डी की पुरानी टिप्पणियाँ और फैसले यूपीए सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं। बावजूद इसके, आज वही यूपीए का हिस्सा रहे दल उन्हें उम्मीदवार बनाकर पेश कर रहे हैं। यह कदम साफ करता है कि विपक्ष एक सियासी चाल चला रहा है — यानी सरकार को यह बताना कि “हमारे पास सिर्फ राजनीतिक चेहरे नहीं, बल्कि सत्ता के खिलाफ खड़े होने वाले न्यायप्रिय लोग भी हैं।”



