राहुल गांधी को मिला वरुण गांधी का साथ, प्रियंका और चाची मेनका गांधी के सुर भी मिले..

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गांधी परिवार के चारों सदस्य—राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, वरुण गांधी और मेनका गांधी—एकजुट दिखाई दे रहे हैं। आम तौर पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और राहों पर खड़े ये लोग इस मामले में एक सुर में बोल रहे हैं, जो कि उनके पारिवारिक और राजनीतिक मतभेदों को भी पीछे छोड़ता दिखता है।
राहुल गांधी: “बेजुबान जीव समस्याएं नहीं”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस आदेश को अमानवीय और दशकों से चली आ रही वैज्ञानिक नीतियों से पीछे हटना बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि आवारा कुत्तों को हटाना क्रूर और अदूरदर्शी है। उनका कहना है कि कुत्ते “समस्याएं” नहीं हैं और आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल से सड़कों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्रियंका गांधी: “शेल्टर में ले जाना भयानक”
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि शहर के सभी स्ट्रे डॉग्स को शेल्टर में ले जाना बेहद अमानवीय होगा। उनका कहना है कि पर्याप्त शेल्टर मौजूद नहीं हैं और शहर में जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मानवता और दयालुता के साथ समस्या का समाधान निकाला जाए।
वरुण गांधी: “क्रूरता का संस्थागतरण”
पूर्व सांसद वरुण गांधी ने इस आदेश को क्रूरता का संस्थागत रूप बताया। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र सहानुभूति से दूर हो जाते हैं, तो नैतिक संकट पैदा होता है। उनका मानना है कि यह कानूनी ढांचा उन मासूम जीवों के खिलाफ बन रहा है, जो अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकते।
मेनका गांधी: “निर्णय अव्यावहारिक और अमानवीय”
पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इसे अव्यावहारिक और देश की भावना के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि हम दुनिया का सबसे दयालु देश हैं और किसी भी जीव के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बच्चों में रेबीज के खतरे को देखते हुए लिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इस पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग कोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ गांधी परिवार की तरह इसे अमानवीय और क्रूर बता रहे हैं।



