किसी के खाते में 37 डिजिट में बैलेंस, किसी में ₹1,13 लाख करोड़.. लोगों ने कहा – “सबके 15-15 लाख इन्ही को मिले”

नई दिल्ली/सिद्धार्थनगर/जमुई/ग्रेटर नोएडा — देशभर से हैरान करने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां आम नागरिकों के बैंक खातों में अचानक से अरबों रुपये का बैलेंस दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में कई ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें लोगों को या तो कुछ समय के लिए अरबपति बना दिया गया या फिर उन्हें बैंक के चक्कर काटने को मजबूर कर दिया गया।
सिद्धार्थनगर: युवक के खाते में आया 37 अंकों वाला बैलेंस
सिद्धार्थनगर के निवासी विनय पांडे के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में अचानक 37 डिजिट का भारी-भरकम बैलेंस दर्ज हो गया। यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि आमतौर पर सरकारी बजट में भी नहीं देखा जाता। जैसे ही यह मामला सामने आया, बैंक ने खाते को तत्काल फ्रीज़ कर जांच शुरू कर दी। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह किसी तकनीकी खामी का परिणाम था या किसी गहरी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है।
ग्रेटर नोएडा: युवक के खाते में दिखे ₹1,13,56,00,00,00,000
ग्रेटर नोएडा के दीपक के खाते में एक दिन अचानक ₹1,13 लाख करोड़ से अधिक की राशि दिखाई दी। युवक खुद भी इस आंकड़े को देखकर हैरान रह गया। बैंक ने यहां भी खाता फ्रीज कर दिया और जांच शुरू कर दी। हालांकि बैंक का कहना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी त्रुटि हो सकती है।
जमुई, बिहार: मजदूर के खाते में दिखे अरबों रुपये
बिहार के जमुई जिले के मजदूर टेनी मांझी के खाते में अचानक अरबों रुपये जमा होने की सूचना मिली। मामला सामने आते ही संबंधित बैंक ने खाता फ्रीज़ कर दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, यह भी एक सिस्टम ग्लिच बताया जा रहा है।
यूपी : अब सिद्धार्थनगर के विनय पांडे के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में 37 डिजिट में पैसा आया है। बैंक ने खाता फ्रीज कर जाचं शुरू की।
इससे पहले ग्रेटर नोएडा के दीपक के खाते में 16 डिजिट में बैंक बैलेंस दिखा रहा था।
लगता है हम सबके 15-15 लाख इन दोनों के खाते में आ गए हैं। https://t.co/iUzvfDJ4Rr pic.twitter.com/bpZt9YA4TA
— Sachin Gupta (@Sachingupta) August 6, 2025
क्या यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी है या किसी घोटाले का संकेत?
भले ही इन मामलों में फिलहाल कोई ठोस चेतावनी या पुष्टि नहीं आई है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों के बीच चर्चा है कि ऐसी घटनाएं सिर्फ ‘ग्लिच’ नहीं हो सकतीं। इन मामलों में काले धन को सफेद करने (money laundering) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी संभव है कि डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा खामी का फायदा उठाया जा रहा हो।
बैंकों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इन घटनाओं ने एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों के बीच भी इस तरह की घटनाओं से भ्रम और डर का माहौल बन गया है। बैंक भले ही इन्हें तकनीकी खामी बता रहे हों, लेकिन लगातार तीन राज्यों से एक जैसी घटनाओं का सामने आना चिंता का विषय है।
सतर्कता ज़रूरी, जवाबदेही भी
बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर इन घटनाओं के बाद नई बहस शुरू हो गई है। जहां आम लोग चाह रहे हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, वहीं यह ज़रूरी है कि बैंक समय रहते पूर्ण तकनीकी ऑडिट कराएं और ऐसी गड़बड़ियों से जुड़ी सच्चाई को सार्वजनिक करें।



