गुरुद्वारों में जूते रखाएँगे शिक्षा मंत्री ‘हरजोत सिंह बैंस’, अकाल तख्त साहिब ने सुनाई सजा.. कर दी बड़ी गलती

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस एक विवादित सांस्कृतिक कार्यक्रम के कारण सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त साहिब के निशाने पर आ गए हैं। श्रीनगर में गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत के मौके पर हुए आयोजन में गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुति को सिख मर्यादा का उल्लंघन माना गया, जिसके चलते अकाल तख्त ने मंत्री को धार्मिक दंड (टंख्या) सुनाया है।
आयोजन में धार्मिक आस्थाओं का उल्लंघन
24 जुलाई 2025 को श्रीनगर में पंजाब सरकार के भाषा विभाग द्वारा गुरु तेग बहादुर जी की शहादत दिवस पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पंजाबी गायक बीर सिंह द्वारा किए गए गीत और नृत्य को लेकर सिख संगत ने तीखी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि शहादत दिवस पर इस प्रकार का प्रदर्शन सिख परंपराओं और गुरुघर की मर्यादा के विरुद्ध है।
मंत्री ने जताया खेद, जत्थेदार के समक्ष पेश हुए
सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने इस मामले में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को बुलाया। मंत्री ने गुरुद्वारा श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होकर अपना दोष स्वीकार किया और कहा,
“जो भी गलती हुई, वह मुझसे हुई है। मैं इसके लिए क्षमा चाहता हूं और भविष्य में सतर्क रहूंगा।”
मंत्री के साथ गए भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह ने कुछ दिन बाद पेश होने की अनुमति मांगी है।
अकाल तख्त साहिब ने सुनाया धार्मिक दंड
जत्थेदार ने मंत्री बैंस को सिख मर्यादा के अनुसार धार्मिक सेवा (Tankhah) का दंड सुनाया, जिसमें उन्हें पंजाब और दिल्ली के प्रमुख गुरुद्वारों में सेवा कार्य करना होगा। सजा के प्रमुख बिंदु:
- पैदल चलकर स्वर्ण मंदिर से गुरु के महल तक सफाई कार्य करेंगे।
- बाबा बकाला साहिब और गुरुद्वारा कोठा साहिब के मार्ग में सफाई करेंगे।
- दिल्ली के शीशगंज साहिब और आनंदपुर साहिब के गुरुद्वारों में 2-2 दिन जूते रखने और परिसर की सफाई सेवा देंगे।
- सभी गुरुद्वारों में ₹1,100 का प्रसाद चढ़ाकर क्षमा याचना करेंगे।
- सेवा पूरी निष्ठा और श्रद्धा से करने की बात कही गई।
SGPC और संगत की तीखी प्रतिक्रिया
SGPC और सिख संगत ने कार्यक्रम में दिखाए गए गीत-संगीत पर पहले ही आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार धार्मिक आयोजनों को ‘शो’ बनाकर पेश कर रही है, जिससे गुरुओं की शहादत की गरिमा आहत होती है। SGPC ने इस घटना को ‘सिख परंपराओं का मज़ाक’ बताया था।
धर्म, जिम्मेदारी और उदाहरण
हरजोत सिंह बैंस द्वारा टंख्या स्वीकार करना और सेवा कार्य करना इस बात का प्रमाण है कि सार्वजनिक जीवन में धार्मिक मर्यादा के प्रति सम्मान आवश्यक है। यह निर्णय आने वाले समय में नेताओं और सरकारी आयोजनों को धार्मिक-संवेदनशीलता बरतने की सीख देगा।



