बड़ी खबर: यूपी में महिला अधिकारी से यौन उत्पीड़न, डिप्टी कमिश्नर समेत 7 निलंबित..

उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले से सामने आए एक गंभीर मामले में महिला अधिकारी के यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) कमलेश कुमार पांडेय सहित आंतरिक शिकायत समिति (विशाखा समिति) के छह सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। महिला अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत की जांच में प्राथमिक स्तर पर आरोप सही पाए गए हैं, जिसके बाद शासन ने यह सख्त कदम उठाया।

डिप्टी कमिश्नर पर लगे यौन शोषण के आरोप

महिला अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी कमलेश कुमार पांडेय पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। इस शिकायत पर प्राथमिक जांच के बाद आरोपों को सही पाया गया। इसके बाद शासन ने उन्हें बांदा स्थित संयुक्त आयुक्त कार्यालय से संबद्ध करते हुए निलंबित कर दिया है।

विशाखा समिति भी आई घेरे में, छह सदस्य निलंबित

महिला अधिकारी की शिकायत पर गठित विशाखा समिति ने जांच के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और आरोपों को दबाने का प्रयास किया। इस पर कार्रवाई करते हुए कोमल छाबड़ा, प्रतिभा, पूजा गौतम, संजीव कुमार, सुनीता देवी और वीरेंद्र कुमार को भी निलंबित कर दिया गया।

शासन का आदेश और जांच अधिकारी की नियुक्ति

इस मामले में उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव रघुबीर प्रसाद ने सभी अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी किए। साथ ही, विशेष सचिव कृतिका ज्योत्सना को नोडल जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो इस मामले की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगी।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरा सवाल

यह घटना उत्तर प्रदेश में महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। जबकि विशाखा गाइडलाइंस के तहत बनी आंतरिक शिकायत समिति का उद्देश्य महिलाओं को न्याय देना है, इस मामले में उसी समिति पर पक्षपात का आरोप लगना प्रशासनिक प्रणाली पर गहरा धब्बा है।

पारदर्शिता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम

इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार महिलाओं के प्रति किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को लेकर गंभीर है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। यह मामला न केवल कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल बनाने की जरूरत को रेखांकित करता है, बल्कि महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी कदम भी है।

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