राजनीतिक तनातनी: ‘मनरेगा पर हमला महात्मा गांधी का अपमान’, राहुल-प्रियंका ने मोदी सरकार की तीखी आलोचना की

मनरेगा को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी टकराव तेज राहुल गांधी बोले – गरीबों की योजना पर हमला गांधी के विचारों का अपमान प्रियंका गांधी का तंज – काम कम, नाम बदलने का जुनून ज्यादा

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर केंद्र एवं कांग्रेस के बीच शब्दों की टक्कर फिर से तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी एवं महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी सरकार पर कड़ा आरोप लगाया है। दोनों नेताओं ने दावा किया है कि सरकार गरीबों के इस योजना को खत्म करने का इरादा रखती है, जो सीधे तौर पर महात्मा गांधी के विचारों पर प्रहार है।

राहुल का तगड़ा हमला: ‘प्रधानमंत्री गांधीजी के सिद्धांतों से हटकर’

राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर संदेह प्रकट करते हुए कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत का आधार है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा को समाप्त करने की किसी भी कोशिश को महात्मा गांधी की अवहेलना के समान माना जाएगा। राहुल ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को वास्तव में महात्मा गांधी के विचारों और दर्शन से परेशानी है, इसलिए उनकी विरासत से जुड़ी योजना को निशाना बनाया जा रहा है। राहुल के उक्त वक्तव्य का संदर्भ उन वार्ताओं के बीच है जहां यह अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है कि सरकार इस क़ानून में कुछ बदलाव कर सकती है जो इसके असली स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रियंका की तंज: ‘कोई काम नहीं, बस नाम बदलने का जुनून’

उसी संदर्भ में, प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार की नीति पर तंज कसते हुए ‘नाम बदलने’ के खेल को समस्या के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार को कामकाज करने से अधिक पुरानी परियोजनाओं और स्थानों के नाम बदलने का जुनून चढ़ा हुआ है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि जब सरकार के पास अपने काम की कोई उपलब्धि नहीं होती, तो वह कांग्रेस के दौर में शुरू की गई जनता के हित वाली योजनाओं के नाम बदलकर या उन्हें कमजोर करके खुद की प्रशंसा कर लेती है।

क्या है सियासी मायने?

मनरेगा हमेशा से कांग्रेस के लिए एक ‘फ्लैगशिप’ योजना रही है, जिसे वे यूपीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानते हैं। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस योजना का बजट कम कर रही है और नियमों को जटिल बना रही है ताकि मजदूरों का इससे मोहभंग हो जाए। दूसरी ओर, राहुल और प्रियंका के ताजा हमलों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक जोर-शोर से उठाने के मूड में है।

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