अरावली रेंज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 100 मीटर वाले आदेश पर स्टे

100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली न मानने के आदेश पर रोक सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी केंद्र और चार राज्यों से मांगा जवाब, 21 जनवरी को अगली सुनवाई

Aravali news: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली रेंज से जुड़े एक अहम आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश उन पहाड़ियों को अरावली का हिस्सा न मानने से जुड़ा था, जिनकी ऊंचाई 100 मीटर से कम है। इस पूरे मामले में कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है और कहा है कि कई तकनीकी और तथ्यात्मक पहलुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

 

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मुद्दे पर गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रम दूर करना जरूरी है, इसी वजह से इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

 

अरावली रेंज की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी

अरावली रेंज की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। इस कमेटी में डोमेन एक्सपर्ट्स शामिल होंगे, जो अरावली पहाड़ियों की संरचनात्मक और पर्यावरणीय स्थिति का अध्ययन करेंगे। अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी तय की गई है।

 

CJI की टिप्पणी: तकनीकी बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी

मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने साफ किया कि अरावली हिल्स और अरावली रेंज को लेकर कुछ तकनीकी बिंदुओं पर अभी स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि कमेटी की सिफारिशें आने तक और उस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला होने तक पहले दिए गए आदेश को स्थगित रखा जाएगा।

 

20 नवंबर के फैसले पर फिलहाल रोक

गौरतलब है कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की उस परिभाषा को स्वीकार किया था, जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली का हिस्सा नहीं माना गया था। इस परिभाषा से अरावली क्षेत्र में नियंत्रित खनन गतिविधियों का रास्ता खुलने की आशंका जताई जा रही थी। अब कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगाते हुए नई जांच समिति बनाने का निर्देश दिया है।

 

केंद्र और चार राज्यों को नोटिस

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अरावली क्षेत्र से जुड़े चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली—को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। अरावली पर्वत श्रृंखला इन चारों राज्यों में फैली हुई है। इसका एक सिरा गुजरात में है और दूसरा दिल्ली तक जाता है, जबकि सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान और हरियाणा में स्थित है।

 

अरावली का पर्यावरणीय महत्व

हालांकि अरावली पर्वत हिमालय जितने ऊंचे नहीं हैं, लेकिन यहां जैव विविधता काफी समृद्ध है। कई तरह के वन्य जीव, पेड़-पौधे और प्राकृतिक संसाधन इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां खनन गतिविधियां बढ़ीं, तो पर्यावरण और वन्य जीवन को गंभीर नुकसान हो सकता है।

 

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि अरावली रेंज की सुरक्षा और परिभाषा को लेकर आगे क्या दिशा अपनाई जाएगी।

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