ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर नजर
ईरान-इजरायल जंग से भारत के तेल-गैस आयात पर खतरा होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रोजाना 25 लाख बैरल तेल प्रभावित एलपीजी और LNG की आपूर्ति भी तनाव में, रणनीतिक भंडार अहम

Iran crisis: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की ईरान की चेतावनी भारत के तेल-गैस आयात के लिए चिंता का विषय बन गई है। यह समुद्री मार्ग अरब देशों से भारत तक तेल-गैस आपूर्ति का अहम रास्ता है, जहां से लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल की आपूर्ति होती है।
भारत के पास कितना तेल भंडार है
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने वैश्विक संकट और युद्ध जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भूमिगत रणनीतिक तेल भंडार तैयार किया है। मुख्य भंडार विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में स्थित हैं, जिनमें कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन तेल जमा है, जो करीब 10 दिन की जरूरत पूरी करता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक भारत के पास कुल 74 दिन का तेल बैकअप है, जिसमें रणनीतिक भंडार, रिफाइनरी स्टॉक और बंदरगाहों का तेल शामिल है। मिशन “समुद्र मंथन” के जरिए इसे 90 दिन तक बढ़ाने की योजना है।
होर्मुज स्ट्रेट से तेल आवाजाही
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज के समुद्री मार्ग से रोजाना लगभग 1.5 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही होती है। यदि गलियारा बंद होता है, तो लगभग 1 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति रुकेगी, जो भारत के कुल तेल व्यापार का करीब 10 फीसदी है। भारत रोजाना औसतन 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से करीब 25 लाख बैरल होर्मुज रूट से आता है। इसमें शामिल हैं इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आने वाला तेल।
कच्चे तेल की लागत और भंडार
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में कच्चा तेल आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी) में 100 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। भारत की रिफाइनरियों में लगभग 10 दिन का तेल भंडार और एक हफ्ते का फ्यूल स्टॉक मौजूद है।इसका मतलब है कि अगर आपूर्ति थोड़े समय के लिए बाधित होती है, तो भारत अपने रणनीतिक भंडार से जरूरतें पूरी कर सकता है। इसके अलावा, वैकल्पिक स्रोतों जैसे अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और वेनेजुएला से भी आपूर्ति की जा सकती है।
प्राकृतिक गैस की चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, एलपीजी और LNG आपूर्ति ज्यादा संवेदनशील है। भारत अपनी जरूरत की 80-85 फीसदी एलपीजी आयात करता है, जिसमें ज्यादातर खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। एलएनजी का 60 फीसदी आयात खाड़ी देशों से होता है। एलपीजी और LNG का तुरंत उपलब्ध विकल्प सीमित है। होर्मुज बंद होने से गैस आपूर्ति संकट गहरा सकता है। भारत को तेल-गैस सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर ध्यान देना जरूरी है।



