आखिर ट्रम्प किसके साथ? मोदी या फिर इमरान? छिड़ी बहस

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‘Howdy Modi’ कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप(Donald Trump) को कई बार प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ताना अंदाज़ में देखा गया। गर्मजोशी से हाथ मिलाना, मंच साझा करना, मोदी को ‘भारत का पिता’ कह देना, मीडिया के सामने ट्रंप ने उन्हें अपनी पहली पसंद तक बता दिया। ट्रंप(Donald Trump) और मोदी(PM Narendra Modi) की दोस्ती का आलम UNGA की महासभा में भी देखने को मिला। लेकिन इसके अगले ही दिन ट्रंप का कुछ ऐसा ही अंदाज़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान(PM Imran Khan) के साथ भी दिखाई दिया।

‘Howdy Modi’ कार्यक्रम के दौरान ट्रंप(Donald Trump) ने पाकिस्तान को अमेरिका और भारत दोनों में आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को शरण देने के लिए आरोपी ठहराया था। उन्होंने(Donald Trump) सीधे शब्दों में पाकिस्तान पर हमला बोला था। इससे अगले ही दिन ट्रंप(Donald Trump) खुद को पाकिस्तान का ‘दोस्त’ कहते नज़र आए। साथ ही ट्रंप ने बातचीत के बाद इमरान खान की पीठ थपथपाई।

मोदी के बाद पाकिस्तान को बताया दोस्त

इमरान खान के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान का दोस्त है। उन्होंने(Donald Trump) यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक “महान नेता” की तरह अपने कई पाकिस्तानी दोस्तों के बारे में बात की। इमरान ने पाकिस्तान के खिलाफ मोदी के बयान पर भी सवाल किया। हालाँकि इससे ठीक एक दिन पहले ट्रंप(Donald Trump) ने मोदी के साथ टेक्सास में साझा रैली निकाली थी।

मोदी संग हाथ मिलाकर इमरान की पीठ ठोकी, ट्रंप की ये कैसी राजनीती

दोनों देश के नेताओं के सामने ट्रंप(Donald Trump) के ‘एक ही बर्ताव’ पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप असल में किस देश के साथ खड़े हैं ? क्या वाक़ई ट्रंप ने भारत से हाथ मिलाया है, या फिर पाकिस्तान को पीठ पीछे सहारा दे रहा है ?

इसपर कई बड़े पत्रकार अपनी अपनी राय दे रहे हैं। भारतीय पत्रकार माहा सिद्दीकी ने ट्वीट किया कि ‘अमेरिकी सैनिकों पर ध्यान और अफगानिस्तान में रुचि रखते हुए ट्रंप “भारत और पाकिस्तान को व्यक्तिगत रूप से वही कह रहे थे, जो दोनों सुनना चाहते थे।’ वहीँ वरिष्ठ पत्रकार और संपादक शेखर गुप्ता ने कहा, “ट्रम्प ट्रम्प ही बन रहे हैं। वह भारत से अपना व्यापार सौदा चाहते हैं, और अफगानिस्तान में पाकिस्तान से मदद चाहते हैं। बेशक वह नोबेल भी चाहते हैं। उन्हें देश या नेता की कोई परवाह नहीं है। लेकिन दोनों देशों के साथ उनके संबंधों में एक स्पष्ट पदानुक्रम है। उम्मीद है कि भारत / मोदी इसमें आगे हो।

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