प्लास्टिक से डीजल! उत्तराखंड सरकार करेगी अद्भुत प्रयोग

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के भारतीय पेट्रोलियम संस्थान में प्लास्टिक से बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया गया है। संसथान में बेकार प्लास्टिक से डीज़ल बनाने के प्लांट लगाया गया है जिसका उद्घाटन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। बीते मंगलवार को प्लांट का उद्घाटन किया गया।

इस संयंत्र की स्थापना से एक तरफ जहाँ वेस्ट मटीरियल का डीजल के रूप में सदुपयोग होगा, वहीं प्लास्टिक से मुक्ति की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस संयंत्र में एक टन प्लास्टिक कचरे से 800 लीटर डीज़ल बनेगा। यह ऐसा पहला प्रायोगिक प्लांट है जिसमें कोई प्लास्टिक वेस्ट नहीं बचता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे प्रोडक्शन बढ़ेगा वैसे-वैसे इसके दाम कम होंगे। केन्द्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि प्लास्टिक से बड़े पैमाने पर डीजल व पेट्रोल उत्पादन शुरु होने के बाद देश में पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र के लिए एनजीओ की मदद से प्लास्टिक कचरे को एकत्रित किया जाएगा। वहीँ मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्लास्टिक के उत्पादों से डीजल बनाने की विधि आईआईपी के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि है। इससे जहां पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी वहीं आर्थिक विकास में भी यह मददगार होगा।

आईआईपी के निदेशक डॉक्टर अंजन कुमार रे ने प्लांट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्लांट को बनने में दस साल का समय और लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत हुई। प्लांट शुरू होने के बाद घाटी में जहाँ प्रदूषण घटेगा, वहीं देश में पेट्रोलियम पदार्थ का एक और स्त्रोत बढ़ जाएगा।

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