वैक्‍सीन से कोरोना के साथ सही होंगी ये बीमारियां

दिल्ली, कोरोना वायरस वैक्‍सीन लेने वाले लोगों में कुछ अन्‍य बीमारियों से जुड़ी परेशानी दूर होने की बात सामने आई है। ब्रिटेन के एक अखबार ने कई पाठकों के अनुभव प्रकाशित किए हैं जिसमें उन्‍होंने कहा कि वैक्‍सीन लगने के बाद, किसी का सालों पुराना दर्द चला गया तो किसी की खुजली ठीक हो गई। एक महिला ने अपने पति के करीब 15 साल पुराने स्‍लीप डिसऑर्डर ठीक हो जाने का दावा किया। कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा किया कि वायरस से संक्रमित होकर ठीक होने के बाद उनकी सेहत पहले से बेहतर स्थिति में है।

इंग्‍लैंड के ग्रेटर मैनचेस्‍टर में रहने वाली 72 साल की जोएन वेकफील्‍ड की पिछले साल अक्‍टूबर में ‘नी रिप्‍लेसमेंट’ सर्जरी हुई थी। तब से वह बमुश्किल चल पाती थीं। टिश्‍यूज में इन्‍फेक्‍शन हो गया था इसलिए भयंकर दर्द रहने लगा था। फरवरी की शुरुआत में उन्‍हें अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन की पहली डोज लगी। वह डेली मेल से बातचीत में कहती हैं, “अगली सुबह मैं उठी तो पैरों का दर्द और अकड़न गायब थी। मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने अपने पार्टनर से मजाक में कहा कि क्‍या वैक्‍सीन की वजह से ऐसा कुछ हुआ। मैं अपना पांव मोड़ तक नहीं पाती थी। अब मैं पूरा पैर सीधा कर सकी हूं और जूते-मोजे पहन सकती हूं। मुझे लगता है कि मैं जल्‍द ही काम पर लौट पाऊंगी।”
एक महिला को बुरी तरह से एग्जिमा था। हाथ, पैरों और करीब आधे बदन में खूब खुजली होती थी। वैक्‍सीन लगने के कुछ ही घंटों बाद एग्जिमा के निशान गायब हो गए।

ऐसा नहीं कि टीकों के ऐसे असर वैज्ञानिकों के लिए नई बात हों। दशकों से इन्‍हें ‘नॉन स्‍पेसेफिक इफेक्‍ट्स’ की कैटिगरी में दर्ज किया जाता रहा है। 70 और 80 के दशक में पता चला था कि चेचक के टीकों ने पश्चिमी अफ्रीकी देशों में बच्‍चों की मौत का खतरा एक-तिहाई तक कम कर दिया था।

 

पोलियो वैक्‍सीन को लेकर रूसी वैज्ञानिकों ने पाया था कि इससे फ्लू और अन्‍य इन्‍फेक्‍शंस से 80 फीसदी तक रोकथाम मिलती है। ग्रीक और डच रिसर्चर्स ने BCG टीके से बुजुर्गों में आम इन्‍फेक्‍शंस का खतरा काम होने के सबूत पाए हैं। टीबी के टीके को कैंसर और अल्‍जाइमर जैसी बीमारियों में भी फायदेमंद होने की बात सामने आई थी।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्‍टर में इम्‍युनोलॉजिस्‍ट प्रफेसर शीना क्रूकशैंक इन सब दावों पर यकीन नहीं करतीं। उनके मुताबिक, इसका कारण बीमारी के प्रति हमारे इमोशनल रेस्‍पांस में छिपा हो सकता है। महामारी की वजह से काफी स्‍ट्रेस हुआ है और हम अक्‍सर स्‍ट्रेस के अपनी सेहत पर असर को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्‍होंने कहा कि बढ़े हुए स्‍ट्रेस हारमोन्‍स के चलते इम्‍युन सेल्‍स की इन्‍फेक्‍शन से लड़ने की ताकत कम हो जाती है। उन्‍होंने कहा कि वैक्‍सीन कई लोगों में स्‍ट्रेस लेवल को कम करेगी जिसका असर इम्‍युन सिस्‍टम पर देखने को मिलेगा।

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