पाकिस्तान का असली चेहरा आया सामने, सिख समुदाय की बेटी का ये हश्र किया

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गुरु नानक देव के जन्मस्थान ननकाना साहिब (जो पाकिस्तान में है) के फर्श पर कुछ सिखों का समूह बैठा है | इनमें जवान और बुजुर्ग शामिल हैं | सब के चेहरे पर बेचैन सी खामोशी है | इन सिखों ने पारंपरिक सलवार-कमीज पहन रखी है | यह ऐतिहासिक गुरद्वारे में किसी धार्मिक आयोजन के लिए इकट्ठा नहीं हुए हैं | बल्कि अपने समुदाय की 19 वर्षीय लड़की के कथित अपहरण और फिर जबरन शादी और धर्म परिवर्तन की घटना पर अपनी चिंता जाहिर करने के लिए जुटे हैं | लड़की ननकाना साहिब के ही पड़ोस में स्थित एक स्थानीय गुरद्वारे के ग्रंथी की बेटी है | एक वीडियो में लड़की के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे जबरन उठा कर इस्लाम धारण कराया गया | एक अन्य वीडियो में लड़की जबरदस्ती की बात से इनकार करते दिखती है | लड़की जिस तरह सहमी-सहमी अपनी रजामंदी की बात कहती है, उस पर पाकिस्तान में सिखों की छोटी सी आबादी को यकीन नहीं हो रहा |

रिकॉर्ड किए संदेश से ज्यादा उनके लिए लड़की का चेहरा ही सारी कहानी बयान कर रहा है | पाकिस्तानी अधिकारियों ने देश में 2017 में हुई जनसंख्या से सिखों को अलग रखा गया था | इसलिए पाकिस्तान में उनकी आबादी का ठीक से अंदाजा नहीं है |पाकिस्तान में 19 साल बाद 2017 में कुल आबादी की गिनती हुई थी | हालांकि सिखों से जुड़े विद्वानों के मुताबिक पाकिस्तान में पिछले दो दशक में सिखों की संख्या तेजी से गिरी है | 2002 में सिखों की जो आबादी 40 हजार थी, वह अब घटकर महज आठ हजार ही रह गई है |

लाहौर की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कल्याण सिंह ने बताई पाकिस्तान में सिखो की दुर्दशा

लाहौर की जीसी कॉलेज यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक और अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता प्रोफेसर कल्याण सिंह कहते हैं कि निश्चित तौर पर सिखों की आबादी घटने के कारणों में से एक जबरन धर्म परिवर्तन भी है | प्रोफेसर सिंह इसके लिए विश्व के समृद्ध सिख समुदाय की ओर से पाकिस्तान के सिखों की दशा की अनदेखी को भी जिम्मेदार ठहराते हैं | प्रोफेसर सिंह ने कहा कि सिखों की ऐसी ही हालत अफगानिस्तान और ईरान में भी है| प्रोफेसर सिंह पाकिस्तान में सिखों या अल्पसंख्यकों के लिए अपना कोई फैमिली लॉ जैसा मजबूत कानून न होने को भी संकट के लिए जिम्मेदार मानते हैं | वह कहते हैं कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कोई खास कानूनी संरक्षण हासिल नहीं है |

1947 में बंटवारे के बाद अधिकतर सिख भारत आ गए थे

सिखों का पाकिस्तान के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है | 1947 में बंटवारे के बाद अधिकतर सिख भारत आ गए और पीछे अपनी संपत्ति, कारोबार के साथ ऐतिहासिक गुरद्वारों की धार्मिक विरासत भी छोड़ आए | 25 साल बाद शिमला समझौते ने सरहद के पार यात्रा और धार्मिक यात्राओं का रास्ता तैयार किया | बीते साल नवंबर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर के नए प्रोजेक्ट के लिए आधारशिला रखी | ये कॉरिडोर पाकिस्तान और भारत में स्थित दो ऐतिहासिक गुरद्वारों को जोड़ेगा | ये प्रोजेक्ट सिखों की आस्था से जुड़े होने की वजह से बहुत अहम है | लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान में सिख आबादी के घटने और जबरन धर्म परिवर्तन की खबरें आ रही हैं, उसने पाकिस्तान के भीतर और बाहर सिख समुदाय को चिंतित कर दिया है |

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