कश्मीर को पहला हिन्दू सीएम देने की खातिर बीजेपी चलेगी ये “ब्रह्मास्त्र”

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केंद्र की मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में लगातार एक्शन में है, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्रालय संभालते ही जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से परिसीमन की कवायद शुरू होने की अटकलें लगने लगीं, अमित शाह के जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग के गठन पर विचार की ख़बर सामने आ रही है, इससे न केवल सियासी सरगर्मी बढ़ गई, बल्कि पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने विरोध भी शुरू कर दिया, दरअसल महबूबा मुफ्ती को डर है कि अगर जम्मू-कश्मीर का परिसीमन हुआ तो उनकी वो राजनीति भी खत्म हो जाएगी जो सिर्फ कश्मीर पर टिकी हुई है, जबकि जम्मू-कश्मीर का मतलब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख है ।

अमित शाह का ‘मिशन कश्मीर’
सरकार जम्मू कश्मीर में परिसीमन कराने की तैयारी में है, इन अटकलों को जोर तब मिला, जब अमित शाह ने गृह मंत्रालय संभालने के बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ बैठक भी की इस लिहाज से माना जा रहा था कि मिशन कश्मीर उनका खास टारगेट है।

सिर्फ महबूबा क्यों हैं परेशान ?
महूबूबा इतनी परेशान हैं उनकी परेशानी उनके ट्वीट में भी दिखती है जिसमें उन्होंने लिखा है कि ‘जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का पुर्नसीमन करने के लिए भारत सरकार की योजना के बारे में सुनकर परेशान हूं. थोपा हुआ परिसीमन राज्य के एक और भावनात्मक विभाजन को सांप्रदायिक आधार पर भड़काने का एक स्पष्ट प्रयास है, पुराने घावों को ठीक करने के बजाय इसका मकसद कश्मीरियों के दर्द को और बढ़ाना है’।

क्या है जम्मू कश्मीर की सीटों का गणित ?
जम्मू-कश्मीर में 111 विधानसभा सीटें हैं, फिलहाल 87 सीटों पर ही चुनाव होते हैं , इसकी वजह यह है कि संविधान के सेक्शन 47 के मुताबिक 24 सीटें खाली रखी जाती हैं, दरअसल, खाली 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए छोड़ी गईं थीं, मगर अब स्थानीय बीजेपी नेता चाहते हैं कि परिसीमन किया जाए और ये खाली 24 सीटें जम्मू क्षेत्र के खाते में जोड़ दी जाएं, जिससे उसे फायदा हो, क्योंकि 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी यहां कुल 37 में से 25 सीटें जीत चुकीं हैं,24 सीटें जम्मू के खाते में जोड़ दी जाए…ऐसा होने पर बीजेपी अपने दम पर जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने का ख्वाब देख सकती है और जम्मू कश्मीर को पहला हिंदू सीएम मिल सकता है। खबरें आईं थीं कि स्थानीय बीजेपी नेता जम्मू-कश्मीर में इसीलिए
परिसीमन चाहते हैं. इसके लिए वे राज्यपाल को पत्र लिखकर भी मांग उठा चुके हैं. जम्मू-कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता ने भी कहा था कि वह राज्यपाल को परिसीमन के लिए लिख चुके हैं, ताकि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र के साथ न्याय हो.

पहले J&k हर 10 साल में होता था परिसीमन
जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान है, जिसके अनुसार हर 10 साल के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाना चाहिए. जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1995 में परिसीमन किया गया था. 1995 में राज्यपाल जगमोहन के आदेश पर जम्मू-कश्मीर में 87 सीटों का गठन किया गया था। ऐसे में राज्य में सीटों का परिसीमन 2005 में होना चाहिए था, लेकिन राज्य में 2002 में तत्कालीन फारुक अब्दुल्ला की सरकार ने इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी। अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बदलाव करते हुए यह फैसला लिया था, देश के अन्य राज्यों में 2002 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हो चुका है, मगर जम्मू-कश्मीर इससे अछूता है।

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