भारत दौरे से लौटने के बाद आया चीन के राष्ट्रपति का वह बयान जो पाकिस्तान के होश उड़ा देगा

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भारत दौरे से लौटने के बाद भारत-चीन संबंधों को विकसित करने के लिए दीर्घकालिक योजना का आह्वान करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन के संबंधों को लेकर बाद बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के संबंधों को किसी भी स्थिति में ‘कमजोर’ नहीं होने दिया जाएगा । शी ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को द्विपक्षीय मतभेदों द्वारा खत्म करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए । वहीं बैठक कर दौरान चीनी राष्ट्रपति ने संबंधों को बाधित किए बिना संबंधों के निरंतर विकास के लिए 6 सूत्रीय फॉर्मूले का प्रस्ताव दिया था । इसके साथ ही शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी को अगली शिखर वार्ता के लिए चीन आने का न्योता दिया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकारा है।

चेन्नई महाबलीपुरम में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दो दिनों की लंबी बैठक के बाद चीनी न्यूज एजेंसी ने एक लंबी रिपोर्ट प्रकाशित की है । रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच चीन-भारत संबंधों पर एक स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श हुआ । इस दौरान दोनों नेताओं ने एक बेहतर दोस्ताना माहौल में दोनों देशों के हित से संबंधित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की । इसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, ‘हमें एक-दूसरे के मूल हितों से संबंधित मुद्दों को सावधानी से हल करना चाहिए । हमें उन समस्याओं का उचित प्रबंधन और नियंत्रण करना चाहिए जो हाल के समय में हल नहीं हो सके हैं ।’

रणनीतिक पारस्परिक विश्वास को बढ़ावा देना चाहिए

गौरतलब है कि भारत दौरे के बाद चीनी राष्ट्रपति शी ने कहा है कि पिछले साल वुहान में मोदी के साथ उनकी सफल बैठक के बाद से, चीन-भारत संबंधों ने स्थिर विकास के एक नए चरण में प्रवेश किया है और बैठक के सकारात्मक प्रभाव लगातार उभर रहे हैं । रिपोर्ट में शी के हवाले से कहा गया कि, ‘सबसे पहले, हमें एक-दूसरे के विकास के बारे में सही दृष्टिकोण रखना चाहिए और रणनीतिक पारस्परिक विश्वास को बढ़ाना चाहिए।’ दो दिवसीय वार्ता के बाद शी ने कहा, ‘किसी भी दृष्टिकोण से देखें तो चीन और भारत अच्छे पड़ोसी हैं और होने भी चाहिए । ये दोनों साथी सद्भाव के साथ एक दूसरे को सहयोग करते हुए आगे बढ़ाते हैं ।’

मैत्रीपूर्ण सहयोग के रास्ते पर चलना चाहिए : शी

दौरे के बाद शी ने कहा, ‘दोनों देशों के बीच अंतर को सही तरीके से देखा जाना चाहिए । हमें उन्हें द्विपक्षीय सहयोग के समग्र हितों और कोशिशों को कम नहीं होने देना चाहिए । उसी समय, हमें एक दूसरे से बात करके चीजों को समझना चाहिए और मतभेदों का लगातार हल करना चाहिए ।’ उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से रणनीतिक तौर पर बातचीत करनी चाहिए, आपसी समझ व सहयोग को बढ़ाना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों के विकास की सामान्य दिशा को मजबूती से पकड़ना चाहिए ।

वहीं रिपोर्ट में शी के हवाले से ‘दोनों देशों को दोस्ती और सहयोग पर ध्यान देते हुए संदेह को दूर करने और मतभेदों व संवेदनशील मुद्दों को ठीक से संभालने की दिशा में काम’ करने की बात कही गई । रिपोर्ट में बताया गया कि चीनी प्रधानमंत्री के अनुसार ‘दोनों देशों को निश्चित रूप से मैत्रीपूर्ण सहयोग के रास्ते पर चलना चाहिए ।’ क्योंकि आने वाले कुछ साल दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण होंगे ।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी समाधान

इसके साथ ही सालों से 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ सीमा विवाद को लेकर शी ने कहा, ‘राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर समझौते के अनुसार, हम सीमा मुद्दे का एक उचित समाधान तलाशेंगे जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।’ उन्होंने कहा कि हमें एक दूसरे के मूल हितों से संबंधित मुद्दों को ध्यान से संभालना चाहिए। हमें उन समस्याओं का उचित प्रबंधन और नियंत्रण करना चाहिए, जिन्हें समय रहते हल नहीं किया जाता।’ साथ ही शी ने दोनों देशों को सैन्य सुरक्षा आदान-प्रदान और सहयोग के स्तर में सुधार करने का भी सुझाव दिया।

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