Wednesday, April 14, 2021

एक ऐसा रहस्यमयी द्वीप जहाँ से कोई वापस नहीं आ पाया !

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भारत में ऐसी कई जगह है जहाँ लोग घूमना पसंद करते है | आजकल लोग देश के कोने-कोने में सिर्फ घूमने ही जाते है | लेकिन हम आपको वो जगह बताएंगे जहाँ पहले लोग घूमने नहीं जाया करते थे लेकिन अब लोगो ने घूमना शुरू कर दिया हैं | यह जगह हैं अंडमान निकोबार द्वीप | पहले इस द्वीप पर लोग घूमने नहीं जाते थे लेकिन अब यहाँ भारत ही नहीं बल्कि विदेशो से भी लोग घूमने आते है | यह द्वीप एक ऐसा द्वीप है जो बेहद खूबसूरत है लेकिन साथ ही में बहुत खतरनाक भी | अंडमान निकोबार पर कई ऐसी जातियां है जिनसे कोई नहीं मिल सकता और न ही कोशिश करना चाहता | निकोबार द्वीप पर ऐसी जातियां रहती हैं जहाँ पर जाना खतरे से खाली नहीं हैं | कुछ लोगो ने यहाँ जाने की कोशिश की हैं लेकिन खतरे को देखते हुए सभी कोशिशे नाकाम ही रही हैं |

हाल ही में एक अमेरिकी मिशनरी को अंडमान – निकोबार द्वीप समूह में रहने वाली एक ऐसी जनजाती के लोगों ने मार डाला जिन्हें बाकी दुनिया से कोई मतलब नहीं है | दुनिया की सबसे खतरनाक जगहों में से एक भारत में है जिसे सेंटिनल द्वीप कहा जाता है जहां अभी भी आदिवासी आदीमानव की तरह ही रहते हैं | ये वो लोग हैं जिनसे किसी भी तरह से बातचीत नहीं की जा सकती |

अमेरिकी टूरिस्ट जॉन एलन चाऊ गैरकानूनी तरीके से इस जनजाति के पास गया और दोस्ती करने की कोशिश की | जॉन को लगता था कि वो इन सेंटिनलीज आदिवासियों को भगवन जीसस के बारे में बताएगा और उन्हें ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करेगा | जॉन ने मछुआरों को 25000 रुपए भी दिए ताकी वो गैरकानूनी तरह से जॉन को आदिवासियों के पास तक ले जा सके | मछुआरा थोड़ी दूर पर जाकर रुक गया और वहां से जॉन अपनी कयाक के जरिए द्वीप तक पहुंचा | पहले दिन तो वो वापस आ गया, लेकिन दूसरे दिन फिर जॉन ने यही किया और इस बार वो वापस नहीं आया | मछुआरे ने द्वीप पर देखा कि जॉन की लाश को आदिवासी घसीटते हुए ले जा रहे हैं |

सेंटिनलीज आदिवासियों की संख्या –

सेंटिनलीज आदिवासियों की असल संख्या क्या है इसके बारे में भी नहीं बताया जा सकता | वहां तक अभी कोई नहीं पहुंच पाया है और उन्हें 50 से 150 के बीच में बताया जाता है | सेंटिनलीज अकेली ऐसी भारतीय जनजाती नहीं है जो खतरे में है या फिर उनके पास जाना खतरे को न्योता देना है | ऐसी कई जातियां है जिनमे से दो जातियों के बारे में हम आपको बताते हैं |

1. सेंटिनलीज जनजाति-

इस जनजाती के बारे में तो अभी तक आप समझ ही गए होंगे कि ये कितनी खतरनाक है क्योकि अमेरिकी टूरिस्ट जॉन एलन चाऊ को इन्होने ही मारा था | यह वो जनजाति है जिनके पास बाहरी लोग नहीं जा सकते हैं | सूनामी के वक्त भारतीय कोस्ट गार्ड्स ने इस आबादी के पास खाने के पैकेट भेजने की कोशिश की थी, लेकिन यहां मौजूद आदिवासियों ने उड़ते हुए हेलिकॉप्टर पर भालों और तीरों से हमला कर दिया था | भारतीय कानून के हिसाब से इस जनजाति के द्वीप पर कोई भी इंसान नहीं जा सकता है | सुनामी के समय बहुत नुक्सान हुआ था लेकिन यह जनजाति उस समय बिना किसी की मदद के बच गई थी | यह कैसे हुआ यह आजतक एक बड़ा रहस्य बना हुआ है |

इनसे जुड़ने की कोशिश कई बार की गई, लेकिन इस जनजाति के लोग, आम लोगों से जुड़ना सही नहीं समझते | इनके द्वीप में जाने वाले किसी भी इंसान को ये मार डालते हैं | सेंटिनलीज अब दुनिया की उन गिनी चुनी जनजातियों में से एक है जिन्हें बाहरी दुनिया से कोई मतलब नहीं और जो असल में काफी खतरनाक हैं |

2. जरावा जनजाति-

यह जनजाति अब थोड़ा सा बाहरी दुनिया से घुलने मिलने लगी है | ये जनजाति भी अंडमान के दक्षिणी हिस्से में रहती है और इनकी आबादी कुछ 250 से 400 के बीच है | टूरिस्ट इनके पास आते हैं | इन्हें खाने के लिए कुछ चीजें देते हैं और यहां महिलाओं से डांस करने को कहते हैं | इस जनजाति को खतरनाक माना जाता है पहले क्योंकि ये लोग खाने के लिए अन्य लोगों पर हमला भी कर देते थे, लेकिन अब ये नए लोगों को देखने और उनके साथ समय बिताने के आदी हो गए हैं | ये जनजाति असल में मॉर्डनाइजेशन का शिकार हो गई है जहां भले ही टूरिस्ट इन्हें ह्यूमन सफारी या ह्यूमन जू की तरह देखते हों, लेकिन इन्हें संरक्षण नहीं दिया जाता और बाकी लोग इन्हें अपनाते नहीं हैं | ये जनजाति भी पहले काफी खतरनाक मानी जाती थी, लेकिन जैसे ही सरकार ने इनके इलाके में रोड बना दी वैसे ही इन्हें बाहर आने का मौका मिल गया लेकिन दिक्कत ये है कि इन लोगों को सिर्फ और सिर्फ उपहास का केंद्र भर माना जाता है |

तो यह वो जनजातियां है जिनसे कोई ज्यादा संपर्क नहीं रखना चाहता | जरावा जनजाति के लोगो से अब थोड़ा मिलाप हो जाता है | इस द्वीप पर कई और जनजातियां भी है जिनसे कोई संपर्क नहीं किया जाता | सरकार के हस्तक्षेप से यहाँ अब बहुत से काम हुए है | जिसके बाद अब इस द्वीप पर जाना काफी सुरक्षित है | अंडमान में लोग घुमा करते है लेकिन निकोबार में कोई नहीं जाता | अंडमान द्वीप पर कई ऐसी जगह हैं जहाँ लोग घूमने का आनंद उठा सकते है | इन द्वीपों पर लोग वाटर स्पोर्ट्स का मज़ा लेने आते हैं | यहाँ एक ऐसी जेल भी हैं जहाँ अंग्रेज़ो के समय में काला पानी की सजा दी जाती थी |

 

चेतन कुमार की रिपोर्ट

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