120 दावेदारों में यूं बांटे जाएंगे हैदराबाद के निजाम के 306 करोड़

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ब्रिटिश अदालत ने हैदराबाद के निजाम के करीब 306 करोड़ रुपये भारत को देने का फैसला किया है। ब्रिटेन की अदालत में 71 साल तक चली कानूनी लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को हराया है। पाकिस्तान के दावे के खारिज होने के बाद अब फोकस इस रकम के बंटवारे पर आ गया है। अब निज़ाम की करीब 306 करोड़ रुपये की संपत्ति को 120 से ज्यादा लोगों में बांटा जा सकता है।

हैदराबाद के निजाम की 35 मिलियन पाउंड यानी करीब 306 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर ब्रिटेन की अदालत में 70 साल तक चली कानूनी लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को हराया है। जानकारी के मुताबिक अब यह रकम भारत सरकार, निजाम के वशंजों मुकर्रम जाह और मुफक्कम जाह और 120 अन्य हिस्सेदारों के बीच बांटी जा सकती है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भारत सरकार भी अपने हिस्से के लिए दावेदारी पेश करेगी या नहीं। निजाम के एक अन्य पोते नजफ अली खां समेत 120 अन्य वशंजों को इस केस में दावेदार बनाया गया था।

जानकारी के अनुसार ये सभी दावेदार अब निजाम इस्टेट का हिस्सा हैं, भारत जिसके समर्थन में है। निजाम इस्टेट का भारत सरकार के साथ एक गोपनीय समझौता था और डील के मुताबिक रकम सभी दावेदारों में बांटी जाएगी।

पैसों से ज्यादा सम्मान

दावेदारों के अनुसार यह मामला भारत के लिए पैसों से ज्यादा सम्मान का था। हालांकि पैसों की तंगी से जूझ रहे हैदराबाद निजाम के वशंजों के लिए यह रकम किसी लॉटरी लगने से कम नहीं है। परिवार के सूत्रों की मानें तो कुछ वशंजों को छोड़कर बाकी लोगों के लिए घर चलाना भी मुश्किल है। बता दें कि देश के विभाजन के दौरान हैदराबाद के 7वें निजाम मीर उस्मान अली खान ने ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के पास बहुत भारी भरकम रकम जमा कराई थी। हालांकि बाद में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सारी संपत्ति पर अपनी दावेदारी जमाने लगे थे।

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