मध्यप्रदेश के इस अस्पताल में मिलती है ‘बीमार’ होने की गारंटी

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मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक ऐसा अस्पताल है, जहाँ आकर मरीज छोड़, मरीज के साथ आने वाले लोग भी बीमार पद जाते हैं। इसका कारण है अस्पताल में संजोकर रखा जा रहा पानी। अमूमन मानसून में देश भर के लोगों को पानी जमा न करने के लिए जागरुक किया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि जमा पानी में जानलेवा बिमारियों के लार्वा पनप सकते हैं। लेकिन इस अस्पताल में जमा पानी का तालाब बना हुआ है। ख़ास बात ये है कि जावद नगर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्रकुमार सकलेचा का गृह नगर है। उनके बेटे पिछले चार बार से विधानसभा में इस शहर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

नीमच जिले के जावद नगर के सरकारी अस्पताल में बारिश से इकट्ठा हुए पानी ने तालाब का आकार ले लिया है। जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर जावद सिविल हॉस्पिटल की हालत दयनीय है। यहाँ पर अस्पताल के चारो और बारिश का पानी भरा पड़ा है जिसकी निकासी की यहाँ पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों व् उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टीकाकरण कक्ष में जाने के लिए लोगों को बड़ी ही सावधानी के साथ दीवार के सहारे चिपक कर जाना पड़ता है। कई बार लोग आते जाते पानी में गिर भी चुके हैं। वहीँ डॉक्टर और अस्पताल के दूसरे स्टाफ को भयंकर बदबू और मच्छरों के बीच रहकर काम करना पड़ता है।

अधिकारियो का है खौफ

अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि नगर परिषद् के सीएमओ को कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। वहीँ पिछले दो साल से अस्पताल की सड़क का निर्माणकार्य अधूरा पड़ा हुआ है। यहाँ रास्ते पर ईंट और लोहे के सरिए यूँ ही पड़े हैं जिनके नीचे सांप और बिच्छुओं ने घर बना लिए हैं। अस्पताल के अंदर कुत्ते इंसानो से ज़्यादा घूमते हैं। लेकिन अधिकारियो के डर की वजह से खुलकर कोई सामने नहीं बोल पा रहा है। हालांकि इस मामले में जवाबदार अधिकारी भी हमेशा की तरह मामले की जांच करवाने का गोल माल जवाब देते दिखाई दे रहे है।

एस एस कच्छावा की रिपोर्ट

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