सीपीएम के येचुरी को इस शर्त पर मिली श्रीनगर जाकर ‘दोस्त’ से मिलने की सुप्रीम इजाजत

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370 हटने के बाद सुरक्षा का हवाला देकर कश्मीर प्रशासन की तरफ से किसी को भी घाटी में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इस मनाही का सामना बीते शनिवार विपक्ष के कई नेताओ को भी करना पड़ा था। हालाँकि इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कश्मीर मसले पर 14 याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें कुछ याचिका कश्मीर में लगी पाबंदियों को हटाने के लिए भी थी।

कश्मीर में प्रवेश की अनुमति को लेकर दिल्ली में पढ़ रहे अनंतनाग मूल के एक छात्र की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने छात्र से पूछा है कि क्या वो अपने परिजनों से संपर्क साध पाए हैं। जामिया विश्विद्यालय के इस छात्र को सुप्रीम कोर्ट ने अनंतनाग जाने की अनुमति दे दी है, ताकि वह अपने परिवार से मिल सके और बाद में दोबारा कोर्ट को रिपोर्ट करें। सॉलिसिटर जनरल ने याचिकाकर्ता के कश्मीर जाने की व्यवस्था करने की ज़िम्मेदारी ली है।

पॉलिटिकल नहीं, पर्सनल विजिट

वहीं दूसरी याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी को भी श्रीनगर जाने की इजाजत दे दी है। सीताराम येचुरी ने याचिका में अपने विधायक एमवाई तरिगामी से मिलने की अनुमति मांगी थी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम आपको आपके दोस्त से मिलने की इजाजत देंगे, लेकिन इस दौरान आप कुछ और काम नहीं कर पाएंगे। चीफ जस्टिस ने पूछा है कि सरकार उन्हें क्यों रोक रही है? वह देश के नागरिक हैं अगर अपने दोस्त से मिलना चाहते हैं, तो मिल सकते हैं। जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि ये पर्सनल नहीं, पॉलिटिकल विजिट थी। इसपर चीफ जस्टिस ने साफ़ किया है कि अदालत येचुरी को सिर्फ उनके दोस्त से मिलने की इजाजत दे रहे हैं। इसके अलावा येचुरी को कोई राजनीतिक कदम उठाने की अनुमति नहीं है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज 14 याचिकाओं पर सुनवाई हुई है। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई अब अक्टूबर में करेगी। गौरतलब है कि मामले को अदालत की संविधान पीठ सुनेगी। इसके साथ ही नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मीडिया की आज़ादी को लेकर 7 दिन में जवाब देने का आदेश दिया है।

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