शास्त्री जी की सादगी की वे कहानियां जो दांतों तले उंगलियां दबाने के लिए मजबूर कर देंगी

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लाल बहादुर शास्त्री के 116वे जन्मदिन पर पूरा देश उन्हें, उनकी विचारधारा और उनके किस्सो को याद कर प्रेरणा ले रहा है । लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री होने के साथ लाखो लोगों के लिए मार्गदर्शक भी रहे हैं । उनकी ईमानदारी, सादगी और विनम्रता के लोग कायल थे । शास्त्री जी से जुड़े ऐसे ही कुछ किस्से जानते हैं ।

लाल बहादुर शास्त्री की विनम्रता के लोग कायल थे । उनके साथ प्रेस एडवाइजर के तौर पर काम करने वाले मशहूर पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने उनके बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए बताया कि शास्त्री जी इतने विनम्र थे कि जब भी उनके खाते में तनख्वाह आती, वो उन्हें लेकर गन्ने का जूस बेचने वाले के पास जाते थे । शास्त्री जी शान से कहते- आज जेब भरी हुई है । फिर दोनों साथ मे गन्ने का जूस पीते ।

वहीं शास्त्री जी अपनी तनख्वाह का अच्छा खासा हिस्सा सामाजिक भलाई और गांधीवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में खर्च किया करते थे । इसलिए अक्सर उन्हें घर की जरूरतों के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता था । घर का बजट बड़ा संतुलित रखना पड़ता था ।

पीएनबी बैंक से कार लोन लेकर खरीदी थी कार

लाल बहादुर ईमानदारी और सादगीभरा जीवन व्यतीत करते थे । दूसरे सामाजिक कार्यों में पैसे खर्च करने के वजह से अक्सर उनके घर पैसों की किल्लत रहा करती थी । उनके प्रधानमंत्री बनने तक उनके पास खुद का घर तो क्या एक कार भी नहीं थी । ऐसे में उनके बच्चे उन्हें कहते थे कि प्रधानमंत्री बनने के बाद आपके पास एक कार तो होनी चाहिए । घरवालों के कहने पर शास्त्रीजी ने कार खरीदने की सोची । उन्होंने बैंक से अपने एकाउंट का डिटेल मंगवाया । पता चला कि उनके बैंक खाते में सिर्फ 7 हजार रुपए पड़े थे । उस वक्त कार की कीमत 12000 रुपए थी ।

देहांत के बाद भी भारी कार की किश्तें

कार खरीदने के लिए उन्होंने बिल्कुल आम लोगों की तरह पंजाब नेशनल बैंक से लोन लिया । 5 हजार का लोन लेते वक्त शास्त्रीजी ने बैंक से कहा कि जितनी सुविधा उन्हें मिल रही है उतनी आम नागरिक को भी मिलनी चाहिए । हालांकि शास्त्रीजी कार का लोन चुका पाते उसके एक साल पहले ही उनका निधन हो गया । उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री बनी इंदिरा गांधी ने लोन माफ करने की पेशकश की । लेकिन शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री नहीं मानी और शास्त्री जी की मौत के चार साल बाद तक कार की ईएमआई देती रहीं । उन्होंने कार लोन का पूरा भुगतान किया ।

कहा जाता है कि वो कार हमेशा लाल बहादुर शास्त्री जी के साथ रही थी । शास्त्रीजी की कार अभी भी दिल्ली लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल में रखी हुई है । ये कार उनकी याद से ज़्यादा उनकी सादगी, और सभी को साथ लेकर चलने की सोच को लोगों में ज़िंदा रखती है ।

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