इसे पढ़ेंगे तो आंख भर आएगी, ऐसे जान जोखिम में डालकर खेती करते हैं किसान!

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दो गांव ग्राम पंचायत बेराखेड़ी और ग्राम पंचायत पटाडित ताज के किसान जान जोखिम में डाल कर करते है खेती। दरसहल हम बात कर रहे है मध्यप्रेदश के देवास जिले की सोनकच्छ तहसील के ग्राम बेराखेड़ी की। जहाँ पर किसान अपनी जान जोखिम में डाल कर अपने खेत पर जाने के लिए नदी पार करने को मजबूर होते नजर आ रहे है। किसान रस्सी के सहारे नदी पार कर खेती कर रहे है। यह मामला मंत्री सज्जनसिंह वर्मा के विधानसभा क्षेत्र का है |

महिलाए और बच्चे भी नहीं हैं सुरक्षित

यहाँ कि महिलाये व बच्चे भी जुगाड़ की रस्सी के सहारे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते है। ऐसे में अगर किसी की जान पर बन आये तो भला इसका जिमेदार कौन होगा..? बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है। हालांकि ग्रामीणों की माने तो सबसे ज्यादा परेशानी बारिश के समय ही आती है। बारिश ज्यादा होने से नदी में पानी ज्यादा रहता है, जिससे गांव से दूर नदी पार किसानों के खेतों पर जाने वाला रास्ता बंद हो जाता है। जिससे किसानों को अपने खेत तक पहुंचने के लिए अपनी जान को खतरे में डालना पड़ता है। हालांकि यह छेत्र पीडब्लूडी मंत्री व छेत्रिय विधायक सज्जन सिंह वर्मा का है। लेकिन किसानों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नही है।

ग्रामीणों ने की है कई बार शिकायत

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित ओर मौखिक शिकायत क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से की है लेकिन आज तक इस समस्या से निजात नही मिली। न तो खेत तक जाने के लिए सड़क है और न ही पुलिया है, न ही कोई खेत तक जाने के लिए दूर दूर तक रास्ता | 100 मीटर के आगे यह नदी क्षेत्र की सबसे बड़ी कालीसिंध नदी में जाकर मिलती है। किसान अपने खेत तक जाने के लिए रोजाना इसी प्रकार जान को हथेली में लेकर तार ओर रस्सी के माध्यम से निकलेते है। ऐसे में कल को कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

 

राजकुमार यादव कि रिपोर्ट

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