चन्द्रमा पर अब उतरने ही वाला है चन्द्रयान, पूरा हुआ ये अहम चरण

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चंद्रयान 2(Chandrayaan 2) ने चाँद की तरफ बढ़ते हुए एक और पड़ाव पार कर लिया है। रविवार शाम तकरीबन 6 चंद्रयान 2 ने चन्द्रमाँ की पांचवी कक्षा में प्रवेश किया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार शाम छः बजकर इक्कीस मिनट पर इस प्रक्रिया को पूरा किया। इस पड़ाव को पूरा करने के बाद इसरो ने वेबसाइट और ट्विटर पर इसकी जानकारी दी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ट्वीट कर कहा ‘ आज (01 सितंबर, 2019) 1821 बजे IST पर चंद्रयान -2 अंतरिक्ष यान को चाँद की अंतिम और पांचवीं कक्षा में सफलतापूर्वक डाला गया। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद से यान के रास्ते में यह पांचवां और अंतिम बदलाव था। इसरो को कक्षा बदलने में 52 सेकंड का वक्त लगा। रविवार शाम चंद्रयान 2 को चाँद की आखिरी कक्षा में डालने के बाद सोमवार दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर चंद्रयान 2 के लैंडर ‘विक्रम’ को ऑर्बिटर से अलग करने की प्रक्रिया शुरू की गई। 1 बजकर 15 मिनट पर यह प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद विक्रम लैंडर 119 किमी x 127 किमी की कक्षा में चक्कर लगाएगा जबकि ऑर्बिटर अपनी पुरानी कक्षा में ही चक्कर लगाता रहेगा। बता दें कि ऑर्बिटर और लैंडर के सही कार्यकरण की निगरानी बेंगलुरु के पास लालू में भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क (IDSN) एंटेना के समर्थन से ISRO टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) द्वारा बेंगलुरु में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (MOX) से की जा रही है।

आगे क्या होगा ?

चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से अलग होने के बाद भी करीब 20 घंटे तक ‘विक्रम’ लैंडर ऑर्बिटर के पीछे-पीछे उसी कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा। इस दौरान इसमें सबसे बड़ी चुनौती यान के आर्बिटर को भी नियंत्रित करने की होगी। वैज्ञानिकों को एक साथ आर्बिटर(Orbiter) और लैंडर विक्रम(Lander Vikram) की सटीकता के लिए काम करते रहना होगा। इसी बीच लैंडर को अगली कक्षा में प्रवेश से पहले उसके साथ एक प्रयोग किया जाएगा। लैंडर(Lander) को पूरी तरह रोककर तीन सेकंड के लिए विपरीत दिशा में चलाकर परखा जाएगा, और फिर वापस उसे अपनी कक्षा में आगे बढ़ाया जाएगा। इसरो इस टेस्ट के जरिए यह पता करेगा कि लैंडर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इस दौरान इसरो वैज्ञानिक करीब 3 सेकंड के लिए लैंडर का इंजन ऑन करेंगे। इस प्रक्रिया को मंगलवार सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर शुरू किया जाएगा। इसके बाद विक्रम लैंडर 109 किमी की एपोजी और 120 किमी की पेरीजी में चांद के चारों तरफ अंडाकार कक्षा में चक्कर लगाएगा। फिर 4 सितंबर को लैंडर चन्द्रमा की सतह की तरफ आगे बढ़ते हुए उसकी सबसे नजदीकी कक्षा में प्रवेश कर चाँद का चक्कर लगाना शुरू करेगा। इस कक्षा की एपोजी 36 किमी और पेरीजी 110 किमी होगी। अगले तीन दिनों तक विक्रम लैंडर इसी अंडाकार कक्षा में चांद का चक्कर लगाता रहेगा। इस दौरान इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर(Rover Pragyan) के सेहत की जांच करते रहेंगे। इसके बाद 6-7 की दरम्यानी रात में रोवर ‘प्रज्ञान’ लैंडर से अलग हो सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। इसके साथ ही भारत चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा और चाँद के दक्षिणी छोर पर जाने वाला पहला देश बन जाएगा

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