100वें जन्मदिन पर गूगल ने दी भारत की महान लेखिका अमृता प्रीतम को अनोखी श्रद्धांजलि

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20वीं सदी की महान लेखिकाओं में एक अमृता प्रीतम(Amrita Pritam) की 100वीं जयंती पर पूरा भारत उन्हें अपने तरीको से श्रद्धांजलि दे रहा है। शनिवार प्रातः गूगल ने उन्हें श्रद्धांजलि के तौर पर एक प्यारा सा डूडल बनाकर समर्पित किया है। इस डूडल में अमृता प्रीतम को सलवार-सूट पहन सिर पर चुन्नी ओढ़ कुछ लिख रही हैं।

इसके डूडल को शेयर करने के साथ गूगल ने ट्वीट किया ‘GoogleDoodle आज प्रसिद्ध पंजाबी लेखक और कवि अमृता प्रीतम की 100 वीं जयंती मना रहा है, साहित्य में उनके योगदान के लिए वे पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित हैं।’ इसके साथ ही उन्हें कई लेखकों और उनके प्रशंसकों ने श्रद्धांजलि दी। पंजाब सरकार ने लिखा,’मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंजाब सरकार प्रमुख पंजाबी कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार अमृता प्रीतम को उनकी जयंती पर याद करती है । सीएम ने कहा कि अमृता प्रीतम द्वारा पंजाबी साहित्य में दिए गए योगदान को सदियों तक याद किया जाएगा।’ वहीँ उनके विख्यात उपन्यास ‘पिंजर’ पर बनी फिल्म में अभिनेत्री उर्मिला मांतोडकर ने लिखा ‘पिंजर” और ऐसे कई खूबसूरत साहित्यिक गहनो के लिए अमृता प्रीतम को धन्यवाद, उनके जन्मदिन पर उन्हें ढेर सारी याद।’ वहीँ अभिनेत्री दिव्या दत्ता(Divya Dutta) ने उनकी एक प्रसिद्ध कविता ‘मैं तेनु फेर मिलांगी’ सुनाते हुए वीडियो शेयर की और लिखा ‘मेरी सबसे पसंदीदा! यह कविता!! आज सबसे अद्भुत अमृता प्रीतम की 100 वीं वर्षगांठ है! इसे सुनाने एक सम्मान जैसा है।’

आत्मकथा का नाम ‘रसीदी टिकट’

अमृता प्रीतम प्रसिद्ध कवयित्री(Poetess), उपन्यासकार(Novel Writer) और निबंधकार थीं। उन्हें 20वीं सदी की पंजाबी भाषा में सर्वश्रेष्ठ कवयित्री माना जाता है। उनका जन्म 31 अगस्त, 1919 को पाकिस्तान का हिस्सा बन चुके गुजरांवाला, पंजाब में हुआ था। शनिवार को उनकी 100वीं जयंती मनाई गयी। अमृत कौर से अमृता प्रीतम बनी इन महान लेखिका ने बहुत छोटी उम्र से लिखना शुरू कर दिया था। किशोरावस्था में ही उनकी पहली किताब प्रकाशित हो गयी थी। उन्होंने कविता, कथा, आत्मकथाएँ, निबंध, पंजाबी लोक गीतों का संग्रह और एक आत्मकथा की कुल मिलाकर लगभग 100 पुस्तकें लिखी हैं। उनकी आत्मकथा का नाम ‘रसीदी टिकट’ था। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया, जिनमें 1956 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1958 में पंजाब सरकार के भाषा विभाग द्वारा पुरस्कार, 1982 में भारत के सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार और 1988 में बल्गारिया वैरोव पुरस्कार (अंतरराष्ट्रीय) प्रमुख हैं। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वे पहली महिला थीं। इनके साथ ही 1969 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित की जाने वाली वे पहली पंजाबी महिला थी।

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